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कान बजते है - मुज़फ्फर हनफ़ी
कान बजते है - मुज़फ्फर हनफ़ी

कान बजते है कि, फिर टूट के बरसे बादल, आँख जब सुख रही थी तो कहा थे बादल तीर बरसे जो नज़र कौसे-कुजहे पर की है आग टपकी है जहा हमने निचोड़े ...

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