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बीते हुए लम्हात
बीते हुए लम्हात

बीते हुए लम्हात का मंज़र नहीं मिलता जिस घर की तमन्ना थी वही घर नहीं मिलता बाज़ार में दुनिया के हरेक शय तो है लेकिन अश्कों से तराशा हुआ पत्थर न...

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आधुनिक शायरी में जनजीवन
आधुनिक शायरी में जनजीवन

स्वर्गीय नूर साहब का यह मज़मून उनके प्रिय शिष्य डा. कृष्ण कुमार ‘नाज़’ ने हमें उपलब्ध कराया, जो उर्दू में नूर साहब की हस्तलिपि में था। नूर ...

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वामिक जौनपुरी- परिचय
वामिक जौनपुरी- परिचय

सैय्यद अहमद मुज्तबा “वामिक जौनपुरी" 23 अक्टूबर 1909 को एतिहासिक शहर जौनपुर से लगभग आठ किमी दूर कजगांव में स्थित लाल कोठी में एक बड़े जमी...

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ज़माना ख़ुदा को खु़दा जानता है- यगाना चंगेज़ी
ज़माना ख़ुदा को खु़दा जानता है- यगाना चंगेज़ी

ज़माना खु़दा को ख़ुदा जानता है यही जानता है तो क्या जानता है वो क्यों सर खपाए तेरी जुस्तजू में जो अंजामे-फ़िक्रेरसा जानता है ख़ुदा ऐस...

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