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जनता के पास एक ही चारा है बगावत - अदम गोंडवी
जनता के पास एक ही चारा है बगावत - अदम गोंडवी

काजू भुने पलेट में, व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है खादी के उजले ल...

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कोई बच्चा बड़ा हो रहा है
कोई बच्चा बड़ा हो रहा है

श्याम बिस्वानी की एक ग़ज़ल - देखो ए क्या, माजरा हो रहा है, कोइ राह चलता, खुदा हो रहा है | ए मौला बता, ए क्या हो रहा है, ए कैसा बुरा, फ़ल्सफ़...

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भूले बिसरे हुए गम - वाली आसी
भूले बिसरे हुए गम - वाली आसी

भूले बिसरे हुए गम याद बहुत करता है मेरे अंदर कोई फरियाद बहुत करता है रोज आता है, डराता है, जगाता है मुझे तंग मुझको मेरा हमजाद बहुत करता...

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मुज़फ्फर हनफ़ी परिचय
मुज़फ्फर हनफ़ी परिचय

उ र्दू अदब के बुलंद क़ामत साहित्यकार और शायर मुज़फ्फ़र हनफ़ी का असली नाम अबुल मुज़फ्फ़र है | उनका जन्म 1 अप्रैल 1936 को खंडवा मध्यप्रदेश में हु...

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वो बाते निकालिये
वो बाते निकालिये

हो जिन से बात साफ़ वो बाते निकालिये दिल के कफस में शक के परिंदे न पालिये अगयार भी जवाब में पत्थर चलायेंगे ये सोचने के बाद ही पत्थर उछालि...

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मेरी सुबह हो के न हो - ज़रीना सानी
मेरी सुबह हो के न हो - ज़रीना सानी

मेरी सुबह हो के न हो मुझे है फिराक़ यार से वास्ता शबे ग़म से मेरा मुकाबला दिले बेकरार से वास्ता मेरी जिन्दगी न संवर सकी मेरे ख्वाब सारे ब...

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सआदत यार खां रंगीन
सआदत यार खां रंगीन

सआदत यार खां 'रंगीन' अपने जमाने के प्रसिद्द कवियों में शुमार किये जाते है | उर्दू शायरी की हसीन रिवायत रही है, उर्दू शायरी का यह स...

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कान बजते है - मुज़फ्फर हनफ़ी
कान बजते है - मुज़फ्फर हनफ़ी

कान बजते है कि, फिर टूट के बरसे बादल, आँख जब सुख रही थी तो कहा थे बादल तीर बरसे जो नज़र कौसे-कुजहे पर की है आग टपकी है जहा हमने निचोड़े ...

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यार आता नजर नहीं आता- कमर जलालाबादी
यार आता नजर नहीं आता- कमर जलालाबादी

यार आता नजर नहीं आता दर्द जाता नजर नहीं आता झोली फैला चुके मोहब्बत की कोई दाता नज़र नहीं आता अब तो कोई भी कु-ए-उल्फत में आता नज़र नह...

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गाली सी चुभती है औकात की बात - प्रदीप तिवारी
गाली सी चुभती है औकात की बात - प्रदीप तिवारी

दिल दिमाग सब बाद की बात चलो करते है पेट और खुराक की बात मेरा ऊंचाइयो से मतलब था तुम करने लगे जिराफ की बात कोई रहनुमा कोई फरिश्ता कोई ...

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बीते हुए लम्हात
बीते हुए लम्हात

बीते हुए लम्हात का मंज़र नहीं मिलता जिस घर की तमन्ना थी वही घर नहीं मिलता बाज़ार में दुनिया के हरेक शय तो है लेकिन अश्कों से तराशा हुआ पत्थर न...

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आधुनिक शायरी में जनजीवन
आधुनिक शायरी में जनजीवन

स्वर्गीय नूर साहब का यह मज़मून उनके प्रिय शिष्य डा. कृष्ण कुमार ‘नाज़’ ने हमें उपलब्ध कराया, जो उर्दू में नूर साहब की हस्तलिपि में था। नूर ...

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वामिक जौनपुरी- परिचय
वामिक जौनपुरी- परिचय

सैय्यद अहमद मुज्तबा “वामिक जौनपुरी" 23 अक्टूबर 1909 को एतिहासिक शहर जौनपुर से लगभग आठ किमी दूर कजगांव में स्थित लाल कोठी में एक बड़े जमी...

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ज़माना ख़ुदा को खु़दा जानता है- यगाना चंगेज़ी
ज़माना ख़ुदा को खु़दा जानता है- यगाना चंगेज़ी

ज़माना खु़दा को ख़ुदा जानता है यही जानता है तो क्या जानता है वो क्यों सर खपाए तेरी जुस्तजू में जो अंजामे-फ़िक्रेरसा जानता है ख़ुदा ऐस...

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आसमां पर कोई सितारा है
आसमां पर कोई सितारा है

आसमां पर कोई सितारा है जो मेरा दूसरा किनारा है एक खुद्दार आदमी के लिए मुझको मरना अभी गवारा है मेरी माँ डर रही है राजा से मुझसे शहजादा...

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न अब कश्मीर रहने दे
न अब कश्मीर रहने दे

न अब कश्मीर रहने दे, न अब बंगाल रहने दे हमेशा के लिए ऐ दिल मुझे भोपाल रहने दे मुहब्बत की गरीबी से मेरा दम घुटने लगता है तू अपने प्यार क...

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