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संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है -अनवर जलालपुरी
संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है -अनवर जलालपुरी

संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है राह सबकी है मगर अज्मे सफर मेरा है सारे फलदार दरख्तों  पे तसर्रुफ उसका जिसमे पत्ते भी नहीं है वह शज़र मे...

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मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आंसू -अख्तर शिरानी
मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आंसू -अख्तर शिरानी

मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आंसू, बन गए शामे-मोहब्बत के सितारे आंसू | देख सकता है भला कौन ये प्यारे आंसू, मेरी आँखों में न आ जाए ...

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किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है -अजय पाण्डेय 'सहाब'
किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है -अजय पाण्डेय 'सहाब'

किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है जो आईने को भी हैरत में डाल देता है वो दौर आया कि नन्हा सा एक जुगनू भी चमकते चाँद में गलती निकाल देता है...

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पानी की तरह रेत के सीने में उतर जा
पानी की तरह रेत के सीने में उतर जा

पानी की तरह रेत के सीने में उतर जा या फिर तू धुआँ बन के खलाओ में बिखर जा लहरा किसी छतनार पे, ओ मीत हवा के सूखे हुए पत्तों से दबे पाँव गुजर ज...

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गज़ब किया तेरे वादे पे एतबार किया
गज़ब किया तेरे वादे पे एतबार किया

इस बरस ग़ज़ल को आम लोगो तक पहुचाने वाले फरिश्तों का जाना हुआ है कुछ समय पहले जगजीत सिंह साहब इस दुनिया से रुकसत हुए और आज पकिस्तान के मशहूर ग़ज़...

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बज़्म में साक़ी का फैज़-ए-आम है
बज़्म में साक़ी का फैज़-ए-आम है

बज़्म में साक़ी का फैज़-ए-आम है और मिरे हाथों में खाली जाम है तल्खियां, महरूमियाँ,नाकामियाँ, ज़िन्दगानी क्या इसी का नाम है ज़िन्दगी चल हट तू अप...

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ग़ालिब और इज़ारबंद की गाँठें
ग़ालिब और इज़ारबंद की गाँठें

इतिहास सिर्फ़ राजाओं और बादशाहों की हार-जीत का नहीं होता. इतिहास उन छोटी-बड़ी वस्तुओं से भी बनता है जो अपने समय से जुड़ी होती हैं और समय ...

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मुझे गर इश्क का अरमान होता
मुझे गर इश्क का अरमान होता

मुझे गर इश्क का अरमान होता, तो घर में 'मीर' का दीवाना होता | किसी तकरीब का सामान होता, कि हमसाया मेरा सामान होता | न होते फ़ासलों के ...

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हिज्र की शब का सहारा भी नहीं - साबिर इंदोरी
हिज्र की शब का सहारा भी नहीं - साबिर इंदोरी

हिज्र की शब का सहारा भी नहीं अब फलक पर कोई तारा भी नहीं बस तेरी याद ही काफी है मुझे और कुछ दिल को गवारा भी नहीं जिसको देखूँ तो मैं दे...

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मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है
मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है

मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सबसे खूबसूरत है कभी-कभी कोई इंसान ऐसा लगता है पुराने शहर में जैसे नयी ईमारत है बहुत दिनो...

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