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ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती
ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती

इस बार आपके लिए देवमणि पांडेय का इक लेख प्रस्तुत कर रहे है आशा है आपको पसंद आएगा यह पहले ही उनके ब्लॉग पर प्रकाशित हो चूका है आप सब अपने विच...

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तुम जो आ जाओ आज दिल्ली में -मखदूम मोहिउद्दीन
तुम जो आ जाओ आज दिल्ली में -मखदूम मोहिउद्दीन

पोस्ट लिखना चाही तो काफी शायर दिमाग के इर्द गिर्द घूमते रहे और उनके कलाम भी | पर कभी लगा के नासिर काज़मी , मुनीर नियाजी , फज़ल ताबिश या कैफ...

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मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें
मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें

मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें चल निकलते जो मै पिये होते क़हर हो या बला हो, जो कुछ हो काश के तुम मेरे लिये होते मेरी क़िस्मत में ग़म गर इतना था...

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तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँ- अहमद नदीम कासमी
तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँ- अहमद नदीम कासमी

तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँ हुस्ने-यज़दां से तुझे हुस्ने-बुताँ तक देखू तुने यूँ देखा है जैसे कभी देखा ही न था मै तो दिल में तेर...

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वो सितमगर है ख्यालात समझने वाला
वो सितमगर है ख्यालात समझने वाला

वो सितमगर है ख्यालात समझने वाला मुझसे पहले मेरे जज्बात समझने वाला मैंने रखा है हमेशा ही तबस्सुम लब पर रो दिया क्यू मेरे हालात समझने वाला...

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अच्छी भली इबादत बेकार हो रही है
अच्छी भली इबादत बेकार हो रही है

अच्छी भली इबादत बेकार हो रही है जन्नत हमारी कब से तैयार हो रही है बारिश से सारी फसलों को फ़ायदे हुए हैं मिटटी कहीं की भी हो हमवार हो रही है ...

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ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी - शाहिद कबीर
ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी - शाहिद कबीर

ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी ये नज़राना तेरा भी है, मेरा भी अपने ग़म को गीत बना कर गा लेना राग पुराना तेरा भी है, मेरा भी मैं तुझको...

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फिर एक दिन ऐसा आयेगा -अली सरदार जाफ़री
फिर एक दिन ऐसा आयेगा -अली सरदार जाफ़री

फिर एक दिन ऐसा आयेगा आँखों के दिये बुझ जायेंगे हाथों के कँवल कुम्हलायेंगे और बर्ग-ए-ज़बाँ से नुक्तो-सदा की हर तितली उड़ जायेगी! इक काल...

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