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निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है - नून मीम राशिद
निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है - नून मीम राशिद

बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियां अकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गया पूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआ कहने लगीं के अक़्ल पे मर्द...

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कब तक आखिर कब तक - काशिफ़ इंदोरी
कब तक आखिर कब तक - काशिफ़ इंदोरी

झूठी सच्ची आस पे जीना कब तक आखिर कब तक मय की जगह खून-ए-दिल पीना कब तक आखिर कब तक सोचा है अब पार उतरेंगे या टकरा कर डूब मरेंगे तुफानो की ...

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मौला खैर करे-बेकल उत्साही
मौला खैर करे-बेकल उत्साही

भीतर बसने वाला खुद बाहर की सैर करे, मौला खैर करे इक सूरत की चाह में फिर काबे को दैर करे, मौला खैर करे इश्क़-विश्क़ ये चाहत-वाहत मन का बहलाव...

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तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी की -अक़ील नोमानी
तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी की -अक़ील नोमानी

तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी की बस यही एक दवा थी मेरी बीमारी की खुद हवा आई है चलकर, तो चलो बुझ जाएँ इक तमन्ना ही निकल जायेगी बेचा...

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ग़ालिब के लतीफे - 5
ग़ालिब के लतीफे - 5

यह रही पांचवी किश्त 1. किसी ने उमराव सिंह नामी एक शागिर्द कि दूसरी बीवी के मरने का हाल मिर्ज़ा को लिखा और उसमे यह भी लिखा कि उसके नन्हे नन...

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ये सोचा नहीं है किधर जाएँगे- आलम खुर्शीद
ये सोचा नहीं है किधर जाएँगे- आलम खुर्शीद

ये सोचा नहीं है किधर जाएँगे मगर हम यहाँ से गुज़र जाएँगे इसी खौफ से नींद आती नहीं कि हम ख्वाब देखेंगे डर जाएँगे डराता बहुत है समन्दर ह...

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बहुत कुछ यूँ तो था - फ़िराक गोरखपुरी
बहुत कुछ यूँ तो था - फ़िराक गोरखपुरी

बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने, अगर सुन लो तो आज एक बात मेरे दिल में आई है मुहब्बत दुश्मनी में कारगर है रश्क का जज़्बा, ...

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अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं - खुमार
अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं - खुमार

अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं मेरी याद से जंग फ़रमा रहे हैं इलाही मेरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं बहुत ख़ुश ...

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खर्च करने से पहले कमाया करो- राहत इंदोरी
खर्च करने से पहले कमाया करो- राहत इंदोरी

उंगलिया यु ना सब पर उठाया करो खर्च करने से पहले कमाया करो जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे बारिशो में पतंगे उडाया करो दोस्तों से मुलाक...

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मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा
मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा

मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा लेकिन मेरी आँखों में तुझे डर न मिलेगा सर पर तो बिठाने को है तैयार जमाना लेकिन तेरे रहने को यहाँ घर न मिल...

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