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अख्तर शीरानी मोहब्बत का शायर
अख्तर शीरानी मोहब्बत का शायर

अख्तर शीरानी को मोहब्बत का शायर कहा जाता है या यु कहे वो मोहब्बत के सबसे बड़े शायर थे क्योंकि नारी को और उसके कारण प्रेम और रोमांस को अपना का...

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सिलसिला ज़ख्म ज़ख्म जारी है -अख्तर नज्मी
सिलसिला ज़ख्म ज़ख्म जारी है -अख्तर नज्मी

सिलसिला ज़ख्म ज़ख्म जारी है ये ज़मी दूर तक हमारी है मैं बहुत कम किसी से मिलता हूँ जिससे यारी है उससे यारी है हम जिसे जी रहे हैं वो लम्हा ...

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दिल तेरी नजर की शह पाकर -ताज भोपाली
दिल तेरी नजर की शह पाकर -ताज भोपाली

दिल तेरी नजर की शह पाकर मिलने के बहाने ढूंढे है गीतों की फजाएं मांगे है गजलों के जमाने ढूंढे है आंखों में लिए शबनम की चमक सीने में लिए दूरी ...

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मज़दूर- सीमाब अकबराबादी
मज़दूर- सीमाब अकबराबादी

गर्द चेहरे पर, पसीने में जबीं डूबी हई आँसुओं मे कोहनियों तक आस्तीं डूबी हुई पीठ पर नाक़ाबिले बरदाश्त इक बारे गिराँ ज़ोफ़ से लरज़ी हुई सारे ब...

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ग़ालिब के लतीफे - 4
ग़ालिब के लतीफे - 4

ग़ालिब के किस्सों की यह चौथी खेप आप सभी के लिए, उम्मीद है आपको पसंद आएगी:- 1 . जाड़े का मौसम था । तोते का पिंजरा सामने रखा था । सर्द हवा चल...

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शोला हूँ धधकने की गुज़ारिश नहीं करता-मुज़फ़्फ़र वारसी
शोला हूँ धधकने की गुज़ारिश नहीं करता-मुज़फ़्फ़र वारसी

शोला हूँ धधकने की गुज़ारिश नहीं करता सच मुंह से निकल जाता है कोशिश नहीं करता गिरती हुइ दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन चड़ते हुए सूरज की परस्तिश नही...

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देखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारी
देखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारी

हाँ इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी देखें कैसी है तेरी रंगबिरंग पिचकारी तेरी पिचकारी की तक़दीद में ऐ गुल हर सुबह साथ ले निकले है सूरज की किरण प...

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बाहर गली में आ गए, घर अपना छोड़ कर
बाहर गली में आ गए, घर अपना छोड़ कर

बाहर गली में आ गए, घर अपना छोड़ कर आजाद कितने हो गए, आईने तोड़ कर हमको सदफ़ मिले कि हज़फ़, देखते रहो कुलजुम से आ मिले है, सफीनों को छोड़ कर ताक...

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