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एक थे शमीम फ़रहत
एक थे शमीम फ़रहत

मै कौन हू – मेरा बाप कौन था? ये सवाल ग्वालियर के एक मुहल्ले में कुछ दशको पहले सुने थे | इन सवालो का संबोधन अधेड़ उम्र की एक महिला फातिमा जुबै...

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मुझको छूके पिघल रहे- शकील आज़मी
मुझको छूके पिघल रहे- शकील आज़मी

मुझको छूके पिघल रहे हो तुम मेरे हमराह जल रहे हो तुम चाँदनी छन रही है बादल से जैसे कपडे बदल रहे हो तुम पायलें बज रही है रह-रह के ये हव...

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आवाज़ दे रही है ये किसकी नज़र मुझे
आवाज़ दे रही है ये किसकी नज़र मुझे

आवाज़ दे रही है ये किसकी नज़र मुझे शायद मिले किनारा वही डूबकर मुझे चाहा तुझे तो खुद से मोहब्बत सी हो गई खोने के बाद मिल गई अपनी खबर मुझे ...

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तुझे कौन जानता था -कैफ भोपाली
तुझे कौन जानता था -कैफ भोपाली

तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहले, तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शायरी से पहले | इधर आ रकीब मेरे, मै तुझे गले लगा लू, मिरा इश्क बे-मज...

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मिली हवाओ में उड़ने की वह सजा यारो
मिली हवाओ में उड़ने की वह सजा यारो

मिली हवाओ में उड़ने की वह सजा यारो कि मै जमीन के रिश्तों से कट गया यारो वे बे-ख्याल मुसाफिर मै रस्ता यारो कहा था बस में मेरे उसे रोकना यारो म...

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सुकूँ से आशना अब तक दिल ए इनसाँ नहीं है
सुकूँ से आशना अब तक दिल ए इनसाँ नहीं है

आपने पिछली कई कड़ियों में ज़िया फतेहाबादी की गज़ले पढ़ी है आज उनके सुपूत्र रविन्दर सोनी जी की एक ग़ज़ल पेश कर रहा हू आशा है आप सभी को पसंद आएगी | ...

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