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बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने,
अगर सुन लो तो आज एक बात मेरे दिल में आई है

मुहब्बत दुश्मनी में कारगर है रश्क का जज़्बा,
अजब रूसवाइयाँ हैं यह, अजब यह जग-हँसाई है

हमीं ने मौत को आँखों में आँखें डालकर देखा,
यह बेबाकी नज़र की यह मुहब्बत की ठिटाई है

मेरे अशआर के मफ़हूम भी है पूछते मुझसे,
बताता हूँ तो कह देते हैं ये तो खुद-सताई है

हमारा झूठ एक चुमकार है बेदर्द दुनिया को,
हमारे झूठ से बदतर ज़माने की सच्चाई है

शब-ए-ग़म झुटपुटे से दम बखुद से थे दिल-ए-मुज़तिर,
सितारे झिलमिलाते हैं तो उसकी याद आई है- फ़िराक गोरखपुरी

मायने
रश्क=ईर्ष्या, रूसवाइयाँ=बदनामी, मफ़हूम=अर्थ, खुद-सताई=आत्म-प्रशंसा, दिल-ए-मुज़तिर=व्याकुल मन

Roman

bahut kuch yun to tha dil me magar lab si liye maine
agar sun lo to aaj ek baar mere dil me aai hai

muhbbat dushmani me kargar hai rashq ka jazba,
ajab ruswaiya hai yah, ajab yah jag-hasai hai

hami ne mout ko aankho me aankhe dalkar dekha
yah bebaki nazar ki yah muhbbat thitai hai

mere ashaar ke mafhoom bhi hai puchte mujhse
batata hu to kah dete hai ye to khud-satai hai

hamara jhut ek chamtkaar hai bedard duniya ko
hamare jhuth se badtar zamane ki sachchai hai

shab-e-gham jhutpute se dam bakhud se the dil-e-muntzir
sitare jhilmilate hai to uski yaad aai hai - Firaq Gorakhpuri

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  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति |
    बधाईयाँ ||

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  2. बहुत कुछ यूँ तो था
    बहुत सुन्दर रचना है

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