0
0
  

मुझको छूके पिघल रहे हो तुम
मेरे हमराह जल रहे हो तुम

चाँदनी छन रही है बादल से
जैसे कपडे बदल रहे हो तुम

पायलें बज रही है रह-रह के
ये हवा है के चल रहे हो तुम

नींद भी टूटने से डरती है
मेरे ख्वाबो में ढल रहे हो तुम- शकील आज़मी