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ऐश की महफ़िल रोज सजाए - अज़ीज़ अंसारी
ऐश की महफ़िल रोज सजाए - अज़ीज़ अंसारी

ऐश की महफ़िल रोज सजाए मिल के सब शैतान गलियों-गलियों तन्हा भटके दुनिया में इंसान किसकी बात को सच मै जानू, किसपे भरोसा रक्खू पंडित मुल्ला-...

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मिर्ज़ा ग़ालिब परिचय
मिर्ज़ा ग़ालिब परिचय

ग़ालिब का जन्म 27 दिसम्बर, 1796 ई. को अकबराबाद में हुआ जो कि अब आगरा के नाम से जाना जाता है | उनके दादा कौकान बेग खां, शाह आलम के अहद ( शासन ...

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मेरी ज़िन्दगी किसी और की
मेरी ज़िन्दगी किसी और की

मेरी ज़िन्दगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है मेरा अक्स है सर-ए-आईना, पसे आईना कोई और है मेरी धड़कनों में है चाप सी, ये जुदाई भी है मिलाप सी...

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दोनों ही पक्ष आये है तैयारियों के  - कुंवर बैचैन
दोनों ही पक्ष आये है तैयारियों के - कुंवर बैचैन

दोनों ही पक्ष आये है तैयारियों के साथ कुछ गर्दनो के साथ है कुछ आरियो के साथ बोया न कुछ भी, फसल मगर ढूंढते है लोग कैसा मजाक चल रहा है क्...

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हमको मगर किसी ने पुकारा कभी न था -आलम खुर्शीद
हमको मगर किसी ने पुकारा कभी न था -आलम खुर्शीद

ऐसा नहीं कि रुकना गवारा कभी न था हमको मगर किसी ने पुकारा कभी न था हालाकि याद आता है अब भी बहुत हमें वो शहर जिसमे कोई हमारा कभी न था हम...

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जज्बात की आवाज-2
जज्बात की आवाज-2

आप पिछली पोस्ट यहाँ पढ़ सकते है जिंदगी में मुझे दूसरों के बाज-बाज अशआर ऐसे मिले, जिन्हें मुझे अपना कहने का बहुत दिल चाहा, बस यु ही जैसे किसी...

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अगरचे देखने में सो रहा था - शमीम फारुकी
अगरचे देखने में सो रहा था - शमीम फारुकी

अगरचे देखने में सो रहा था मगर अंदर से मै जागा हुआ था कहा तक हम उसे जाते बुलाने वो काफी देर पहले जा चूका था अब आया है तो आने दो, न रोक...

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मोर्चा सर हो गया
मोर्चा सर हो गया

उनका दावा मुफलिसी का मोर्चा सर हो गया पर हकीकत ये है मौसम और बदतर हो गया बंद कल को क्या किया मुखिया के खेतों में बेगार अगले दिन ही एक ह...

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वो सर्द फासला बस आज कटने वाला था
वो सर्द फासला बस आज कटने वाला था

वो सर्द फासला बस आज कटने वाला था मै इक चराग की लौं से लिपटने वाला था बहुत बिखेरा मुझे मेरे मेहरबानो ने मीरा वजूद ही लेकिन सिमटने वाला थ...

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पत्थर सुलग रहे थे कोई नक़्शे-पा न था- मुमताज़ राशिद
पत्थर सुलग रहे थे कोई नक़्शे-पा न था- मुमताज़ राशिद

पत्थर सुलग रहे थे कोई नक़्शे-पा न था हम जिस तरफ चले थे, उधर रास्ता न था परछाईयो के शहर में तन्हाईयां न पूछ अपना शरीके-गम कोई अपने सिवा न...

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न आरजू न तमन्ना, कहाँ चले आये - अहमद हमदानी
न आरजू न तमन्ना, कहाँ चले आये - अहमद हमदानी

न आरजू न तमन्ना, कहाँ चले आये थकन से चूर ये तनहा कहाँ चले आये रुकी-रुकी सी हवाए घुटा-घुटा माहौल ये रात-रात अँधेरा कहाँ चले आये घरोंदा ...

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जज्बात की आवाज - कृष्ण बिहारी नूर
जज्बात की आवाज - कृष्ण बिहारी नूर

जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो मै नहीं कहता किताबो में लिखा है यारो अमिताभ बच्चन की आवाज में यह शेर भारत के बच्चे-बच्चे की जुबान...

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अब आने वाली ग़ज़ल का मिजाज़ क्या होगा  -अशोक मिजाज़
अब आने वाली ग़ज़ल का मिजाज़ क्या होगा -अशोक मिजाज़

बदल रहे है यहाँ सब, रिवाज़ क्या होगा मुझे ये फ़िक्र है, कल का समाज क्या होगा लहू तो कम है मगर रक्तचाप भरी है अब ऐसे रोग का आखिर इलाज क्या...

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आए है इस गली में तो पत्थर ही ले चले - नासिर काजमी
आए है इस गली में तो पत्थर ही ले चले - नासिर काजमी

कुछ यादगारे-शहरे-सितमगर ही ले चले आए है इस गली में तो पत्थर ही ले चले यु किस तरह कटेगा कड़ी धुप का सफर सर पर ख्याले-यार की चादर ही ले चल...

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श्याम ! मै तौरी गैया चराऊ
श्याम ! मै तौरी गैया चराऊ

आँख जब आईने से हटाई श्याम सुन्दर से राधा मिल आई आये सपनो में गोकुल के राजा देने सखियों को आयी बधाई प्रेम-जल खूब गागर में भर लू आज बादल ने मा...

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लम्हों का खज़ाना - मीना कुमारी नाज़
लम्हों का खज़ाना - मीना कुमारी नाज़

मीना कुमारी का कल यानी एक अगस्त को जन्मदिवस था उनके जन्मदिवस पर यह आज़ाद नज़्म पेश है - कितनी लालची हूँ मै कितने ढेर सरे लम्हे जमा कर र...

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दुख का अहसास न मारा जाये
दुख का अहसास न मारा जाये

दुख का अहसास न मारा जाये आज जी खोल के हारा जाये इन मकानों में कोई भूत भी है रात के वक्त पुकारा जाये सोचने बैठे तो इस दुनिया में एक लम्हा न ग...

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चाँद सितारों से क्या पुछूँ कब दिन मेरे फिरते हैं- आबिद अली आबिद
चाँद सितारों से क्या पुछूँ कब दिन मेरे फिरते हैं- आबिद अली आबिद

चाँद सितारों से क्या पुछूँ कब दिन मेरे फिरते हैं वो तो बेचारे ख़ुद हैं भिखारी डेरे डेरे फिरते हैं जिन गलियों में हम ने सुख की सेज पे राते...

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आपके दिल ने हमें आवाज दी, हम आ गए- पयाम सईदी
आपके दिल ने हमें आवाज दी, हम आ गए- पयाम सईदी

आपके दिल ने हमें आवाज दी, हम आ गए हमको ले आई मोहब्बत आपकी, हम आ गए अपने आने का सबब हम क्या बताए आपको बैठे बैठे याद आई आपकी, हम आ गए हम...

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क्यों ये समझू वो अब पराया है
क्यों ये समझू वो अब पराया है

क्यों ये समझू वो अब पराया है सिर्फ उसने मुझे गवाया है अब कि जब उसने शहर छोड़ दिया उस गली से गुजरना आया है इक तमाशा हू आज सबके लिए उसने इतना म...

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धुन ये है आम तेरी राहगुजर होने तक
धुन ये है आम तेरी राहगुजर होने तक

धुन ये है आम तेरी राहगुजर होने तक हम गुजर जाये जमाने को खबर होने तक मुझको अपना जो बनाया है, तो एक और करम बेखबर कर दे जमाने को खबर होने तक अब...

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संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है -अनवर जलालपुरी
संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है -अनवर जलालपुरी

संग में नहर बनाने का हुनर मेरा है राह सबकी है मगर अज्मे सफर मेरा है सारे फलदार दरख्तों  पे तसर्रुफ उसका जिसमे पत्ते भी नहीं है वह शज़र मे...

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मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आंसू -अख्तर शिरानी
मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आंसू -अख्तर शिरानी

मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आंसू, बन गए शामे-मोहब्बत के सितारे आंसू | देख सकता है भला कौन ये प्यारे आंसू, मेरी आँखों में न आ जाए ...

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किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है -अजय पाण्डेय 'सहाब'
किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है -अजय पाण्डेय 'सहाब'

किसी किसी को वो ऐसा जमाल देता है जो आईने को भी हैरत में डाल देता है वो दौर आया कि नन्हा सा एक जुगनू भी चमकते चाँद में गलती निकाल देता है...

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पानी की तरह रेत के सीने में उतर जा
पानी की तरह रेत के सीने में उतर जा

पानी की तरह रेत के सीने में उतर जा या फिर तू धुआँ बन के खलाओ में बिखर जा लहरा किसी छतनार पे, ओ मीत हवा के सूखे हुए पत्तों से दबे पाँव गुजर ज...

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गज़ब किया तेरे वादे पे एतबार किया
गज़ब किया तेरे वादे पे एतबार किया

इस बरस ग़ज़ल को आम लोगो तक पहुचाने वाले फरिश्तों का जाना हुआ है कुछ समय पहले जगजीत सिंह साहब इस दुनिया से रुकसत हुए और आज पकिस्तान के मशहूर ग़ज़...

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बज़्म में साक़ी का फैज़-ए-आम है
बज़्म में साक़ी का फैज़-ए-आम है

बज़्म में साक़ी का फैज़-ए-आम है और मिरे हाथों में खाली जाम है तल्खियां, महरूमियाँ,नाकामियाँ, ज़िन्दगानी क्या इसी का नाम है ज़िन्दगी चल हट तू अप...

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ग़ालिब और इज़ारबंद की गाँठें
ग़ालिब और इज़ारबंद की गाँठें

इतिहास सिर्फ़ राजाओं और बादशाहों की हार-जीत का नहीं होता. इतिहास उन छोटी-बड़ी वस्तुओं से भी बनता है जो अपने समय से जुड़ी होती हैं और समय ...

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मुझे गर इश्क का अरमान होता
मुझे गर इश्क का अरमान होता

मुझे गर इश्क का अरमान होता, तो घर में 'मीर' का दीवाना होता | किसी तकरीब का सामान होता, कि हमसाया मेरा सामान होता | न होते फ़ासलों के ...

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हिज्र की शब का सहारा भी नहीं - साबिर इंदोरी
हिज्र की शब का सहारा भी नहीं - साबिर इंदोरी

हिज्र की शब का सहारा भी नहीं अब फलक पर कोई तारा भी नहीं बस तेरी याद ही काफी है मुझे और कुछ दिल को गवारा भी नहीं जिसको देखूँ तो मैं दे...

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मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है
मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है

मिरी ग़ज़ल की तरह उसकी भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सबसे खूबसूरत है कभी-कभी कोई इंसान ऐसा लगता है पुराने शहर में जैसे नयी ईमारत है बहुत दिनो...

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ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती
ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती

इस बार आपके लिए देवमणि पांडेय का इक लेख प्रस्तुत कर रहे है आशा है आपको पसंद आएगा यह पहले ही उनके ब्लॉग पर प्रकाशित हो चूका है आप सब अपने विच...

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तुम जो आ जाओ आज दिल्ली में -मखदूम मोहिउद्दीन
तुम जो आ जाओ आज दिल्ली में -मखदूम मोहिउद्दीन

पोस्ट लिखना चाही तो काफी शायर दिमाग के इर्द गिर्द घूमते रहे और उनके कलाम भी | पर कभी लगा के नासिर काज़मी , मुनीर नियाजी , फज़ल ताबिश या कैफ...

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मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें
मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें

मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें चल निकलते जो मै पिये होते क़हर हो या बला हो, जो कुछ हो काश के तुम मेरे लिये होते मेरी क़िस्मत में ग़म गर इतना था...

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तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँ- अहमद नदीम कासमी
तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँ- अहमद नदीम कासमी

तुझे खोकर भी तुझे पाऊ जहाँ तक देखूँ हुस्ने-यज़दां से तुझे हुस्ने-बुताँ तक देखू तुने यूँ देखा है जैसे कभी देखा ही न था मै तो दिल में तेर...

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वो सितमगर है ख्यालात समझने वाला
वो सितमगर है ख्यालात समझने वाला

वो सितमगर है ख्यालात समझने वाला मुझसे पहले मेरे जज्बात समझने वाला मैंने रखा है हमेशा ही तबस्सुम लब पर रो दिया क्यू मेरे हालात समझने वाला...

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अच्छी भली इबादत बेकार हो रही है
अच्छी भली इबादत बेकार हो रही है

अच्छी भली इबादत बेकार हो रही है जन्नत हमारी कब से तैयार हो रही है बारिश से सारी फसलों को फ़ायदे हुए हैं मिटटी कहीं की भी हो हमवार हो रही है ...

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ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी - शाहिद कबीर
ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी - शाहिद कबीर

ग़म का ख़ज़ाना तेरा भी है, मेरा भी ये नज़राना तेरा भी है, मेरा भी अपने ग़म को गीत बना कर गा लेना राग पुराना तेरा भी है, मेरा भी मैं तुझको...

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फिर एक दिन ऐसा आयेगा -अली सरदार जाफ़री
फिर एक दिन ऐसा आयेगा -अली सरदार जाफ़री

फिर एक दिन ऐसा आयेगा आँखों के दिये बुझ जायेंगे हाथों के कँवल कुम्हलायेंगे और बर्ग-ए-ज़बाँ से नुक्तो-सदा की हर तितली उड़ जायेगी! इक काल...

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निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है - नून मीम राशिद
निकलो न बेनकाब, ज़माना खराब है - नून मीम राशिद

बेपर्दा नज़र आयी कल जो चन्द बीबियां अकबर ज़मीं में गैरत-ए-क़ौमी से गड़ गया पूछा जो मैने आप का पर्दा वो क्या हुआ कहने लगीं के अक़्ल पे मर्द...

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कब तक आखिर कब तक - काशिफ़ इंदोरी
कब तक आखिर कब तक - काशिफ़ इंदोरी

झूठी सच्ची आस पे जीना कब तक आखिर कब तक मय की जगह खून-ए-दिल पीना कब तक आखिर कब तक सोचा है अब पार उतरेंगे या टकरा कर डूब मरेंगे तुफानो की ...

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मौला खैर करे-बेकल उत्साही
मौला खैर करे-बेकल उत्साही

भीतर बसने वाला खुद बाहर की सैर करे, मौला खैर करे इक सूरत की चाह में फिर काबे को दैर करे, मौला खैर करे इश्क़-विश्क़ ये चाहत-वाहत मन का बहलाव...

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तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी की -अक़ील नोमानी
तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी की -अक़ील नोमानी

तेरी यादों से, तेरे ग़म से वफ़ादारी की बस यही एक दवा थी मेरी बीमारी की खुद हवा आई है चलकर, तो चलो बुझ जाएँ इक तमन्ना ही निकल जायेगी बेचा...

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ग़ालिब के लतीफे - 5
ग़ालिब के लतीफे - 5

यह रही पांचवी किश्त 1. किसी ने उमराव सिंह नामी एक शागिर्द कि दूसरी बीवी के मरने का हाल मिर्ज़ा को लिखा और उसमे यह भी लिखा कि उसके नन्हे नन...

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ये सोचा नहीं है किधर जाएँगे- आलम खुर्शीद
ये सोचा नहीं है किधर जाएँगे- आलम खुर्शीद

ये सोचा नहीं है किधर जाएँगे मगर हम यहाँ से गुज़र जाएँगे इसी खौफ से नींद आती नहीं कि हम ख्वाब देखेंगे डर जाएँगे डराता बहुत है समन्दर ह...

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बहुत कुछ यूँ तो था - फ़िराक गोरखपुरी
बहुत कुछ यूँ तो था - फ़िराक गोरखपुरी

बहुत कुछ यूँ तो था दिल में मगर लब सी लिए मैंने, अगर सुन लो तो आज एक बात मेरे दिल में आई है मुहब्बत दुश्मनी में कारगर है रश्क का जज़्बा, ...

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अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं - खुमार
अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं - खुमार

अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं मेरी याद से जंग फ़रमा रहे हैं इलाही मेरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं बहुत ख़ुश ...

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खर्च करने से पहले कमाया करो- राहत इंदोरी
खर्च करने से पहले कमाया करो- राहत इंदोरी

उंगलिया यु ना सब पर उठाया करो खर्च करने से पहले कमाया करो जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे बारिशो में पतंगे उडाया करो दोस्तों से मुलाक...

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मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा
मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा

मै यह नहीं कहता कि मेरा सर न मिलेगा लेकिन मेरी आँखों में तुझे डर न मिलेगा सर पर तो बिठाने को है तैयार जमाना लेकिन तेरे रहने को यहाँ घर न मिल...

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अख्तर शीरानी मोहब्बत का शायर
अख्तर शीरानी मोहब्बत का शायर

अख्तर शीरानी को मोहब्बत का शायर कहा जाता है या यु कहे वो मोहब्बत के सबसे बड़े शायर थे क्योंकि नारी को और उसके कारण प्रेम और रोमांस को अपना का...

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