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कैसे कैसे हादसे सहते रहे - वाजिदा तबस्सुम
कैसे कैसे हादसे सहते रहे - वाजिदा तबस्सुम

कैसे कैसे हादसे सहते रहे, हम यूँही जीते रहे हँसते रहे उसके आ जाने की उम्मीदें लिए रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे वक्त तो गुजरा मगर कु...

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अपने आप को मरते हुए देख
अपने आप को मरते हुए देख

दिन इक के बाद एक गुजरते हुए देख इक दिन तो अपने आप को मरते हुए देख हर वक्त खिलते फुल की जानिब तका न कर मुरझा के पत्तियों को बिखरते हुए भी देख...

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ग़ालिब बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे
ग़ालिब बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे

आईना क्यों न दू की तमाशा कहे जिसे ऐसा कहा से लाऊ की तुझ सा कहे जिसे हसरत ने ला रखा तेरी बज्मे-ख्याल में गुलदस्ता-ए-निगाह, सुवैदा कहे जिस...

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क्या हुआ तुमको अगर चेहरे बदलना आ गया - कृष्ण कुमार नाज़
क्या हुआ तुमको अगर चेहरे बदलना आ गया - कृष्ण कुमार नाज़

क्या हुआ तुमको अगर चेहरे बदलना आ गया हमको भी हालात के साँचे में ढलना आ गया रोशनी के वास्ते धागे को जलते देखकर ली नसीहत मोम ने उसको पिघलन...

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