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मोहब्बत को गले का हार भी करते नहीं बनता
मोहब्बत को गले का हार भी करते नहीं बनता

मोहब्बत को गले का हार भी करते नहीं बनता कुछ ऐसी बात है इनकार भी करते नहीं बनता खुलुसे-नाज़ की तौहीन भी देखी नहीं जाती शऊरे-हुस्न को बेदा...

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मख़दूम की याद में-2 - फैज़ अहमद फैज़
मख़दूम की याद में-2 - फैज़ अहमद फैज़

मखदूम की याद में पहली कड़ी याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िरे-शब दिल में बिख़री कोई ख़ुशबू-ए-क़बा आख़िरे-शब सुब्‍ह फूटी तो वो पहलू से उ...

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जेहन-ए-आदमियत पर
जेहन-ए-आदमियत पर

जेहन-ए-आदमियत पर मस्लेहत के पहरे है लोग जितने मुख्लिस है, जख्म उतने गहरे है फुल है यहाँ कांटे, जिस्म है यहाँ पत्थर किस जहा के वासी है, क...

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