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दरिया ने जब से - बेदिल हैदरी
दरिया ने जब से - बेदिल हैदरी

दरिया ने जब से चुप का लिबादा पहन लिया प्यासों ने अपने जिस्म पे सेहरा पहन लिया वो टाट की कबा थी या कागज था जो भी था जैसा भी मिल गया हमें ...

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आहट हमारी सुन के वो - तुर्फैल चर्तुवेदी
आहट हमारी सुन के वो - तुर्फैल चर्तुवेदी

आहट हमारी सुन के वो खिड़की में आ गये अब तो ग़ज़ल के शेर असीरी में आ गये साहिल पे दुश्मनों ने लगाई थी ऐसी आग हम बदहवास डूबती कश्ती में आ...

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धूप के साथ गया, साथ निभाने वाला - वजीर आगा
धूप के साथ गया, साथ निभाने वाला - वजीर आगा

धूप के साथ गया, साथ निभाने वाला अब कहां आएगा वो, लौट के आने वाला। रेत पर छोड़ गया, नक्श हजारों अपने किसी पागल की तरह, नक्श मिटाने वाला।...

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परिचय- डा. ज़रीना सानी
परिचय- डा. ज़रीना सानी

डा. ज़रीना सानी का जन्म 5, जुलाई, 1936 को नागपुर शहर (महाराष्ट्र) में हुआ था | आपके पिता अब्दुल रहीम (चक्कीवाले) एक प्रगतिशील विचारक थे | ...

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खुदा तो खैर मुस्लमा था
खुदा तो खैर मुस्लमा था

आज़ादी के समय के आसपास लिखे गये तीन शेरो के बारे में पढते है जिनके बारे में मशहूर शायर निदा फाज़ली लिख रहे है और विश्लेषण कर रहे है | जगन्ना...

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मिलेगी शेख को जन्नत हमें दौजख अता होगा
मिलेगी शेख को जन्नत हमें दौजख अता होगा

मिलेगी शेख को जन्नत हमें दौजख अता होगा बस इतनी बात है, जिसके लिए महशर बपा होगा रहे दोनों फ़रिश्ते साथ अब इन्साफ क्या होगा किसी ने कुछ लिख...

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अपने जीवन में सादगी रखना- चाँद शेरी
अपने जीवन में सादगी रखना- चाँद शेरी

अपने जीवन में सादगी रखना आदमियत की शान भी रखना बंद जेहनो के दर-दरीचो से तुम न उम्मीदे-रौशनी रखना डस न ले आस्तीन के साप कही इन से महफ...

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दर्द दिल दर्द आशना जाने - बहादुर शाह ज़फ़र
दर्द दिल दर्द आशना जाने - बहादुर शाह ज़फ़र

दर्द दिल दर्द आशना जाने और बेदर्द कोई क्या जाने जुल्फ तेरी है वह बला काफ़िर पूछ मुझसे तेरी बला जाने बेवफा जाने क्या वफ़ा मेरी बावफा हो...

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क्यों जल गया न, ताबे-रूखे-यार देखकर-मिर्ज़ा ग़ालिब
क्यों जल गया न, ताबे-रूखे-यार देखकर-मिर्ज़ा ग़ालिब

क्यों जल गया न, ताबे-रूखे-यार देखकर जलता हू अपनी ताकते-दीदार देखकर साबित हुआ है गर्दने-मीना पे खूने-खल्क लरजे है मौजे-मय तेरी रफ़्तार दे...

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तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है - जाँ निसार अख्तर
तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है - जाँ निसार अख्तर

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचू अजीब लगता है जिसे ना हुस्न से मतलब ना इश्क़ से सरोकार वो शख्स मुझ को बहुत बदनसीब ल...

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नज़र-नवाज़ नजारा बदल न जाए कही - दुष्यंत कुमार
नज़र-नवाज़ नजारा बदल न जाए कही - दुष्यंत कुमार

नज़र-नवाज़ नजारा बदल न जाए कही जरा-सी बात है मुह से निकल न जाए कही वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है मेरे बयान को बंदिश न लग जाये कही ...

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