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दयार-ए-दिल की रात में -नासिर काज़मी
दयार-ए-दिल की रात में -नासिर काज़मी

दयार-ए-दिल की रात में चिराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक़्ल तो दिखा गया जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिये तुझे भी नींद...

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दायरा- कैफी आज़मी
दायरा- कैफी आज़मी

रोज बढ़ता हू जहा से आगे फिर वही लौट के आ जाता हू बारहा तोड़ चुका हू जिनको उन्ही दीवारों से टकराता हू रोज बसते है कई शहर नए रोज धरती मे...

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ग़ालिब - निदा फ़ाज़ली
ग़ालिब - निदा फ़ाज़ली

निदा फ़ाज़ली के बारे में जितना कहा जाये उतना कम है | आप एक मशहूर शायर और लेखक है, आपने कई शायरों पर लेख लिखे है जिनमे से ग़ालिब पर लिखा यह...

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वो बेहद मेहरबा कमरा- जावेद अख्तर
वो बेहद मेहरबा कमरा- जावेद अख्तर

मै जब भी जिंदगी की चिलचिलाती धुप में तपकर मै जब भी दूसरों के और अपने झूट से थककर मै सबसे लड़ के खुद से हार के जब भी उस एक कमरे में जाता था ...

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ग़ालिब के खत -5
ग़ालिब के खत -5

28 मार्च सन् 1853 ई. भाई, आज मुझको बड़ी तशवीश है। और यह खत मैं तुमको कमाल सरासीमगी में लिखता हूँ। जिस दिन मेरा ख़त पहुँचे, अगर वक्त डाक का ...

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खुदा ने दिल बनाकर क्या अनोखी शय बनाई है
खुदा ने दिल बनाकर क्या अनोखी शय बनाई है

खुदा ने दिल बनाकर क्या अनोखी शय बनाई है ज़रा सा दिल है, इस दिल में मगर सारी खुदाई है ये दिल अल्लाह का घर है, ये दिल भगवान का घर है बदी दि...

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अंदाज हू-ब-हू  - अहमद नदीम कासमी
अंदाज हू-ब-हू - अहमद नदीम कासमी

अंदाज हू-ब-हू तेरी आवाजे-पा का था देखा निकलके घर से तो झोका हवा का था उस हुस्ने-इत्तिफाक पे लूटकर भी शाद हू तेरी रजा जो थी, वो तकाज़ा वफ़...

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हम देखेंगे – फैज़ अहमद फैज़
हम देखेंगे – फैज़ अहमद फैज़

हम देखेंगे यह नज्म फैज़ अहमद फैज़ की अन्य नज्मो में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखती है और यह नज्म पाकिस्तान में इक़बाल बानो ने अपने पुरे शबाब पर गाई...

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वो खुद को सजाये नहीं रख सका
वो खुद को सजाये नहीं रख सका

मेरी बेखुदी का तसलसुल बनाये नहीं रख सका ज्यादा दिनों तक वो खुद को सजाये नहीं रख सका मै खोया तो इसमें ज्यादा खता भी उसी की ही थी वही भीड़ में ...

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नक़्शे-कदम देखते है
नक़्शे-कदम देखते है

जहा तेरा नक़्शे-कदम देखते है खियाबां-खियाबां इरम देखते है दिल आशुफ्तगा खालें-कुंजे-दहन के सुवैदा मै सैरे-अदम देखते है तेरे सरू कामत से एक कद्...

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परिचय-फैज़ अहमद फैज़
परिचय-फैज़ अहमद फैज़

फैज़ अहमद फैज़ के बारे में क्या बताया जाये और क्या ना बताया जाए यह तय कर पाना काफी मुश्किल है | फिर भी यह शुरुवात की जाए | 13 फ़रवरी, 1911 क...

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