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रोने से और इश्क में बेबाक हो गये
रोने से और इश्क में बेबाक हो गये

रोने से और इश्क में बेबाक हो गये धोए गए हम ऐसे कि बस पाक हो गये सर्फे-बहा-ए-मय हुए आलाते-मयकशी थे ये ही दो हिसाब, यो यूँ पाक हो गये रुसवा-ए-...

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अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जायेंगे - शेख इब्राहीम ‘जौक’
अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जायेंगे - शेख इब्राहीम ‘जौक’

आपने अगर ग़ालिब के बारे में पढ़ा है तो यह जरूर सुना होगा कि  एक बार जौक के एक शेर कहने पर ग़ालिब उछल पड़े थे, लीजिए शेख इब्राहीम जौक़ का वही ...

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कोई ये कैसे बताये के वो तन्हा क्यों है
कोई ये कैसे बताये के वो तन्हा क्यों है

कोई ये कैसे बताये के वो तन्हा क्यों है वो अपना था, वही और किसी का क्यों है यही दुनिया है तो फिर, ऐसी ये दुनिया क्यों है यही होता है तो, ...

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आपकी याद आती रही - मखदूम, फैज़
आपकी याद आती रही - मखदूम, फैज़

आप लोगो ने गमन फिल्म तो देखी ही होगी जो कि सन 1978 में आई थी | इसका एक गीत सीने में जलन जो की शहरयार साहब का लिखा हुआ है भी काफी मशहूर हुआ ...

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ग़ालिब के खत -4
ग़ालिब के खत -4

परसों तुम्हारा ख़त आया। हाल जो मालूम था, वह फिर मालूम हुआ। ग़ज़लें देख रहा था। आज शाम को देखना तमाम हुआ था। ग़ज़लों को रख दिया था। चाहता था ...

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मै पत्थर हू, पिघलना चाहता हू-जाज़िब कुरैशी
मै पत्थर हू, पिघलना चाहता हू-जाज़िब कुरैशी

तेरी खुशबु में जलना चाहता हू मै पत्थर हू, पिघलना चाहता हू उजालो ने दिए है जख्म ऐसे कि जिस्मो-जा बदलना चाहता हू मै अपनी प्यास का सहरा ...

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मुझ से पहली सी मोहब्बत - फैज़ अहमद फैज़
मुझ से पहली सी मोहब्बत - फैज़ अहमद फैज़

फैज़ अहमद फैज़ का यह वर्ष (2011) जन्म शताब्दी वर्ष है आपको जल्द ही फैज़ पर और उनके जीवन पर आधारित लेख पढ़ने को मिलेंगे फिलहाल फैज़ साहब कि यह नज...

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आप को देख कर देखता रह गया
आप को देख कर देखता रह गया

आप को देख कर देखता रह गया क्या कहुँ और कहने को क्या रह गया आते आते मेरा नाम सा रह गया उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया वो मेरे सामने ही गया औ...

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ग़ालिब के खत -3
ग़ालिब के खत -3

जनवरी सन् 1856 ई. असदुल्ला क्यों महाराज? कोल में आना और मुंशी नबी बख्श साहिब के साथ ग़ज़ल ख़ानी करनी और हमको याद न लाना। मुझसे पूछो कि मै...

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इश्क ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
इश्क ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया

गैर ले महफ़िल में बोसे तेरे नाम के हम रहे यु तशनालब पैगाम के खस्तगी का तुझसे क्या शिकवा कि ये हथकंडे है चर्खे-नीली फाम के खत लिखेंगे, ...

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मेरे मेहमान - मजाज़ लखनवी -2
मेरे मेहमान - मजाज़ लखनवी -2

इसकी पिछली कड़ी आप यहाँ पढ़ सकते है | जो लोग मजाज को उसकी बेरोजगारी के लिए निशाना बनाते है, वो नहीं जानते की इस बेरोजगारी के पीछे उसकी ...

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मेरा मेहमान मजाज़
मेरा मेहमान मजाज़

यादे याद रह जाती है और यही हमें कुछ वक्त के बाद सताती है, रुलाती है और चेहरे पर मुस्कराहट का कारण भी बन जाती है कुछ इसी तरह की यादे जाँनि...

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