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अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं  - निदा फ़ाज़ली
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं - निदा फ़ाज़ली

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है अपने ही घर में किसी द...

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माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊँ - मुनव्वर राना
माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊँ - मुनव्वर राना

मेरी ख़्वाहिश है कि फिर से मैं फ़रिश्ता हो जाऊँ माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊँ कम-से कम बच्चों के होठों की हंसी की ख़ातिर ऎ...

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जिंदगी उनकी चाह में गुजरी -शकील बदायुनी
जिंदगी उनकी चाह में गुजरी -शकील बदायुनी

जिंदगी उनकी चाह में गुजरी मुस्तकिल दर्दो आह में गुजरी रहमतों से निबाह में गुजरी उम्र सारी गुनाह में गुजरी हाय, वह जिंदगी कि इकसाअत ...

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