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ग़ालिब के खत -2
ग़ालिब के खत -2

फरवरी सन् 1852 ई.असदुल्ला शफ़ीक़ बित-तहक़ीक़ मुंशी हरगोपाल तफ्ता हमेशा सलामत रहें, आपका वह ख़त जो आपने कानपुर से भेजा था, पहुँचा। बाबू साहि...

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चल मुसाफिर बत्तिया जलने लगी - बशीर बद्र
चल मुसाफिर बत्तिया जलने लगी - बशीर बद्र

चल मुसाफिर बत्तिया जलने लगी आसमानी घंटिया बजने लगी दिन के सारे कपडे ढीले हो गए रात कि सब चोलिया कसने लगी डूब जाएँगे, सभी दरिया, पहाड ...

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ग़ालिब के खत -1
ग़ालिब के खत -1

(अगस्त सन् 1849 ई) महाराज, आपका मेहरबानीनामा पहुँचा। दिल मेरा अगर्चे खुश न हुआ, लेकिन नाखुश भी न रहा। बहरहाल, मुझको कि नालायक़ व ज़लीलतरीन ...

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खंडहर बचे हुए है, ईमारत नहीं रही- दुष्यंत कुमार
खंडहर बचे हुए है, ईमारत नहीं रही- दुष्यंत कुमार

खंडहर बचे हुए है, ईमारत नहीं रही, अच्छा हुआ कि सर पे कोई छत नहीं रही | कैसी मशाले लेके चले तीरगी में आप, जो रौशनी थी वो भी सलामत नह...

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साहिल पे समंदर के किनारे नहीं आते - बशीर बद्र
साहिल पे समंदर के किनारे नहीं आते - बशीर बद्र

होठो पर मोहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समंदर के किनारे नहीं आते पलके भी चमक उठती है सोते में हमारी आँखों में अभी ख्वाब छुपाने नहीं आ...

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प्यार का पहला ख़त लिखने में -हस्तीमल हस्ती
प्यार का पहला ख़त लिखने में -हस्तीमल हस्ती

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है, नये परिन्दों को उड़ने में वक़्त तो लगता है | जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था, लम्...

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पत्थरों के जिस्म में भी दिल मिला - संजय ग्रोवर
पत्थरों के जिस्म में भी दिल मिला - संजय ग्रोवर

पत्थरों के जिस्म में भी दिल मिला एक दिन रोता हुआ कातिल मिला फिर उसे शैतान ठहराया गया फिर उसे सच्चाई का हासिल मिला वो भंवर से छूट तो आय...

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एक पगली लड़की - कुमार विश्वास
एक पगली लड़की - कुमार विश्वास

अमावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है, जब दर्द की प्याली रातों में गम आंसू के संग होते हैं, जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेल...

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यु तेरी रहगुज़र से, दीवानावार गुजरे - मीना कुमारी
यु तेरी रहगुज़र से, दीवानावार गुजरे - मीना कुमारी

यु तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुजरे काँधे पे रख के अपना मज़ार गुजरे बैठे है रास्ते में बयाबान-ए-दिल सजाकर शायद इसी तरफ से एक दिन बहार ग...

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ग़ालिब के खत
ग़ालिब के खत

ग़ालिब उर्दू और फ़ारसी के एक प्रभावशाली कवि हुए हैं। फ़ारसी की शायरी पर उन्हें बड़ा गर्व था। परंतु वह अपनी उर्दू शायरी की बदौलत बहुत मशहूर...

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कब याद मे तेरा साथ नहीं  - फैज़ अहमद फैज़
कब याद मे तेरा साथ नहीं - फैज़ अहमद फैज़

कब याद मे तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं साद शुक्र की अपनी रातो में अब हिज्र की कोई रात नहीं मुश्किल है अगर हालात वह, दिल...

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ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते- ख़्वाजा हैदर अली आतिश
ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते- ख़्वाजा हैदर अली आतिश

ये आरज़ू थी तुझे गुल के रूबरू करते हम और बुलबुल-ए-बेताब गुफ़्तगू करते पयाम बर न मयस्सर हुआ तो ख़ूब हुआ ज़बान-ए-ग़ैर से क्या शर की आरज़ू ...

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परिचय - सीमाब अकबराबादी
परिचय - सीमाब अकबराबादी

सी माब अकबराबादी, अबू बक्र सिद्दीकी ( इस्लाम के पहले खलीफा ) के वंशज थे काकू गली, नई मंडी, आगरा इमलीवाले मकान में सन 1880 में पैदा हुए थे | ...

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कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ नहीं देखा - मुनव्वर राना
कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ नहीं देखा - मुनव्वर राना

कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ नहीं देखा तुम्हारे बाद किसी की तरफ नहीं देखा ये सोच कर के तेरा इंतजार लाजिम है तमाम उम्र घडी की तरफ नहीं देखा ...

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चुगने देते है चिडियों को खेत अपने - कुमार पाशी
चुगने देते है चिडियों को खेत अपने - कुमार पाशी

दिल को भी हम राह पे लाते रहते है खुद को भी कुछ-कुछ समझाते रहते है चादर अपनी बढे, घटे ये फ़िक्र नहीं पाँव हमेशा हम फैलाते रहते है चुगने...

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सादगी पर उसकी मर जाने की हसरत दिल में है - ग़ालिब
सादगी पर उसकी मर जाने की हसरत दिल में है - ग़ालिब

सादगी पर उसकी मर जाने की हसरत दिल में है बस नहीं चलता, की फिर खंज़र कफ़े-कातिल में है देखना तकरीर की लज्जत कि जो उसने कहा मैंने यह जाना...

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आदमी को किस तरह अपनी कज़ा मालूम हो - ख्वाजा हैदर अली आतिश
आदमी को किस तरह अपनी कज़ा मालूम हो - ख्वाजा हैदर अली आतिश

दोस्त हो जब दुश्मन-ए-जाँ तो क्या मालूम हो आदमी को किस तरह अपनी कज़ा मालूम हो आशिक़ों से पूछिये खूबी लब-ए-जाँबख्श की जौहरी को क़द्र-ए-लाल...

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होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है - निदा फ़ाज़ली
होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है - निदा फ़ाज़ली

होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है उन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं आज जाना...

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सूरज छुपाने वालों को बादल नहीं मिला - अहमद निसार
सूरज छुपाने वालों को बादल नहीं मिला - अहमद निसार

मैं मसअला हूँ मुझको अभी हल नहीं मिला सूरज छुपाने वालों को बादल नहीं मिला तुम दोस्ती के गीत सुनाते तो हो मगर इस पेड़ में हमें तो कभी फल...

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सोचा नहीं अच्छा बुरा - बशीर बद्र
सोचा नहीं अच्छा बुरा - बशीर बद्र

सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं मांगा खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं देखा तुझे सोचा तुझे चाहा तुझे पूजा तुझे मेरी ख़ता...

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दुनिया मेरी नज़र से तुझे देखती रही - मेहर लाल ज़िया फतेहाबादी
दुनिया मेरी नज़र से तुझे देखती रही - मेहर लाल ज़िया फतेहाबादी

दुनिया मेरी नज़र से तुझे देखती रही फिर मेरे देखने में बता क्या कमी रही क्या ग़म अगर क़रार ओ सुकूँ की कमी रही ख़ुश हूँ कामयाब मेरी ज़िन्दग...

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मीरा के गीतों-छंदों से आती है मोहन की खुशबू - चाँद शेरी
मीरा के गीतों-छंदों से आती है मोहन की खुशबू - चाँद शेरी

पाकर चन्दन तन की खुशबू महकी घर आँगन की खुशबू लेकर आई रुत मतवाली अधरों से चुम्बन की खुशबू मीरा के गीतों-छंदों से आती है मोहन की खुश...

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