1
हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है-अकबर इलाहबादी
हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है-अकबर इलाहबादी

हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है। ना-तजुर्बाकारी से, वाइज़ की ये बातें हैं इस रंग को क्या ज...

Read more »

0
नहीं है जिनको मजाले-हस्ती, सिवाए इसके वो क्या करेंगे - जिगर मुरादाबादी
नहीं है जिनको मजाले-हस्ती, सिवाए इसके वो क्या करेंगे - जिगर मुरादाबादी

न ताबे-मस्ती, न होशे हस्ती की शुक्रे-नेमत अदा करेंगे खिज़ा में जब है यह अपना आलम, बहार आई तो क्या करेंगे हर एक ग़म को फ़रोग देकर यहाँ तक आरा...

Read more »

3
आखिरी वक़्त मुस्कुराना है  - बशीर बद्र
आखिरी वक़्त मुस्कुराना है - बशीर बद्र

दर्द की बस्तिया बसाके रखो रहमतो को सजा-सजा के रखो कागजो के घरो से दूर ज़रा दिल की चिंगारिया दबा के रखो आग के झिलमिलाते फूलो से दिल का...

Read more »

0
यह इश्क का है घर कोई दारुल-अमां नहीं - दाग़ देहलवी
यह इश्क का है घर कोई दारुल-अमां नहीं - दाग़ देहलवी

हुस्ने -अदा भी खूबी-ए-सूरत में चाहिए यह बढती दौलत, ऐसी ही दौलत में चाहिए आ जाए राहे-रास्त पर काफ़िर तेरा मिज़ाज एक बंदा-ए-खुदा तेरी खिदमत ...

Read more »

0
गिला लिखू अगर मै तेरी बेवफाई का -मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी सौदा
गिला लिखू अगर मै तेरी बेवफाई का -मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी सौदा

गिला लिखू अगर मै तेरी बेवफाई का लहू में ग़र्क सफ़ीना हो आशनाई का दिमाग झड गया आखिर तिरा न, ऐ नमरूद चला न पिशा से कुछ बस तिरी खुदाई का ...

Read more »

0
हवाए दिलसिता जब राग सावन के सुनाती है - जोश मलीहाबादी
हवाए दिलसिता जब राग सावन के सुनाती है - जोश मलीहाबादी

हवाए दिलसिता जब राग सावन के सुनाती है किसी काफ़िर की जब रह-रह के दिल में याद आती है सिमट जाती है, जब बिजली दिखा कर अब्र से झलकी फलक पर...

Read more »

1
तुने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग - फ़ानी बदायुनी
तुने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग - फ़ानी बदायुनी

एक मुअम्मा है समझने का न समझाने का जिन्दगी काहे को है, ख्वाब दीवाने का जिन्दगी भी तो पशेमां है यहाँ लाके मुझे ढूंढ़ती है कोई हिला मेरे मर ज...

Read more »

0
हैरा हु, दिल को रोऊ कि पिटू जिगर को मै
हैरा हु, दिल को रोऊ कि पिटू जिगर को मै

हैरा हु, दिल को रोऊ कि पिटू जिगर को मै मकदुर हो तो साथ रखु नौहागर को मै छोड़ा न रश्क ने की तेरे घर का नाम लू हर एक से पूछता हु की जाऊ किधर को...

Read more »

0
आइना देख अपना सा मुह लेके रह गए
आइना देख अपना सा मुह लेके रह गए

आइना देख  अपना सा मुह लेके रह गए साहब को दिल न देने पे कितना गुरुर था कासिद की अपने हाथ से गर्दन न मारिए उसकी खता नहीं है ये मेरा कुसूर था म...

Read more »

2
जब्त का हौसला नहीं बाकी - फैज़ अहमद फैज़
जब्त का हौसला नहीं बाकी - फैज़ अहमद फैज़

हिम्मते-इल्तिजा नहीं बाकी जब्त का हौसला नहीं बाकी इक तेरी दीद छीन गई मुझसे वरना दुनिया में क्या नहीं बाकी अपनी मश्के-सितम से हाथ न खेच...

Read more »

0
सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा - बशीर बद्र
सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा - बशीर बद्र

सुनो पानी में ये किसकी सदा है कोई दरिया की तह में रो रहा है सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा खुदा चारो तरफ बिखरा हुआ है पके गेहू की खुशबु च...

Read more »

1
न कोई ख्वाब हमारे है, न ताबीरे है - क़तील शिफाई
न कोई ख्वाब हमारे है, न ताबीरे है - क़तील शिफाई

न कोई ख्वाब हमारे है, न ताबीरे है हम तो पानी पे बनाई हुई तस्वीरे है लुट गए मुफ्त में दोनों, तिरी दौलत मिरा दिल ए सखी ! तेरी-मेरी एक स...

Read more »

0
मुद्दत से तो दिल कि मुलाकात भी गई  - मीर तकी मीर
मुद्दत से तो दिल कि मुलाकात भी गई - मीर तकी मीर

मुद्दत से तो दिल कि मुलाकात भी गई जाहिर का पास था, सो मदारात भी गई कितने दिनों से आई थी उसकी शबे-विसाल बाहम रही लड़ाई, सो वह रात भी गई ...

Read more »

1
रिश्ते होते है शायरी की तरह - बशीर बद्र
रिश्ते होते है शायरी की तरह - बशीर बद्र

आसुओ से धुली ख़ुशी की तरह रिश्ते होते है शायरी की तरह जब कभी बादलो में घिरता है चाँद लगता है आदमी की तरह सब नजर का फरेब है वरना कोई हो...

Read more »

3
दुनिया से जा रहे है यह दौलत कमा के हम- मुनव्वर राना
दुनिया से जा रहे है यह दौलत कमा के हम- मुनव्वर राना

किरदार पर गुनाह की कालिख लगा के हम दुनिया से जा रहे है यह दौलत कमा के हम जितनी तव्क्कुआत जमाने को हम से है उतनी तो उम्र भी नहीं लाए लिखा...

Read more »

2
मै जहा हू सिर्फ वही नहीं, मै जहा नहीं हू वहा भी हू - राजेश रेड्डी
मै जहा हू सिर्फ वही नहीं, मै जहा नहीं हू वहा भी हू - राजेश रेड्डी

तेरे-मेरे दीन का मसअला नहीं, मसअला कोई और है न तेरा खुदा कोई और है न मेरा खुदा कोई और है मै जहा हू सिर्फ वही नहीं, मै जहा नहीं हू वहा भी ...

Read more »

0
तू दोस्त किसी का भी सितमगर न हुआ था
तू दोस्त किसी का भी सितमगर न हुआ था

तू दोस्त किसी का भी सितमगर न हुआ था औरो पे है वो जुल्म की मुझ पर न हुआ था छोड़ा महे-नखशब की तरह दस्ते-क़ज़ा ने खुर्शीद हनोज उसके बराबर न हुआ था...

Read more »

1
कैसा-कैसा जब्र अपने आप पर मैंने किया - वसीम बरेलवी
कैसा-कैसा जब्र अपने आप पर मैंने किया - वसीम बरेलवी

क्या बताऊ कैसा खुद को दर-ब-दर मैंने किया उम्र भर किस-किस के हिस्से का सफ़र मैंने किया तू तो नफरत भी न कर पायेगा इस शिद्दत के साथ जिस बला...

Read more »

1
तू पास नहीं और पास भी है- साहिर लुधियानवी
तू पास नहीं और पास भी है- साहिर लुधियानवी

मायूस तो हू वायदे से तेरे, कुछ आस नहीं कुछ आस भी है मै अपने ख्यालो के सदके, तू पास नहीं और पास भी है दिल ने ख़ुशी मांगी थी मगर, जो तुन...

Read more »

2
नशा पिलाके गिरना तो सबको आता है - इक़बाल
नशा पिलाके गिरना तो सबको आता है - इक़बाल

नशा पिलाके गिरना तो सबको आता है मजा तो जब है की गिरतो को थाम ले साकी जो बादाकश थे पुराने वो उठते जाते है कही से आबे-बकाए-दवाम ले साक...

Read more »

0
ख़ामोशी कह रही है कान में क्या - जाँन एलिया
ख़ामोशी कह रही है कान में क्या - जाँन एलिया

ख़ामोशी कह रही है कान में क्या आ रहा है मेरे गुमान में क्या अब मुझे कोई टोकता भी नहीं यही होता है खानदान मे क्या बोलते क्यों नहीं मे...

Read more »

0
इब्ने-मरियम हुआ करे कोई
इब्ने-मरियम हुआ करे कोई

इब्ने-मरियम हुआ करे कोई मेरे दुख की दवा करे कोई शरओ-आइन पर मदार सही ऐसे कातील का क्या करे कोई चाल, जैसे कड़ी कमां का तीर दिल में ऐसे के जा कर...

Read more »

0
गमे-दुनिया से गर पाई भी फुर्सत उठाने की
गमे-दुनिया से गर पाई भी फुर्सत उठाने की

गमे-दुनिया से गर पाई भी फुर्सत उठाने की फलक का देखना, तकरीब तेरे याद आने की खुलेगा किस तरह मजमुं मेरे मक्तूब का यारब कसम खाई है उस काफ़िर ने ...

Read more »

1
तिरी निगाह के जादू बिखरते जाते है  - नासिर काज़मी
तिरी निगाह के जादू बिखरते जाते है - नासिर काज़मी

तिरी निगाह के जादू बिखरते जाते है जो जख्म दिल को मिले थे, वो भरते जाते है तेरे बगेर वो दिन भी गुजर गया आखिर तेरे बगेर ये दिन भी गुजरत...

Read more »

1
दिल ले के चले हो तो लिए जाओ नजर भी- जिगर मुरादाबादी
दिल ले के चले हो तो लिए जाओ नजर भी- जिगर मुरादाबादी

हाय क्या चीज़ थी, क्या चीज़ थी जालिम की नज़र भी उफ़ करके वही बैठ गया दर्दे-जिगर भी होती ही नहीं कम सबे-फुरकत की सियाही रुखसत हुई क्या शाम ...

Read more »

1
मै खुद भी सोचता हू ये क्या मेरा हाल है - जावेद अख्तर
मै खुद भी सोचता हू ये क्या मेरा हाल है - जावेद अख्तर

मै खुद भी सोचता हू ये क्या मेरा हाल है जिसका जवाब चाहिए, वो क्या सवाल है घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था क्या मुझसे खो गया है, ...

Read more »
 
 
Top