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कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँही जीते रहे हँसते रहे

उसके आ जाने की उम्मीदें लिए
रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे

वक्त तो गुजरा मगर कुछ इस तरह
हम चरागों की तरह जलते रहे

कितने चेहरे थे हमारे आस-पास
तुम ही तुम दिल में मगर बसते रहे- वाजिदा तबस्सुम



Roman

kaise kaise hadse sahte rahe
ham yuhi jeete rahe haste rahe

uske aa jane ki ummide liye
rasta mud-mud ke ham takte rahe

waqt to gujra magar kuch is tarah
ham charago ki tarah jalte rahe

kitne chehre the hamare aas-paar
tum hi tum dil me magar basate rahe- Wajida Tabssum

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