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जहा तेरा नक़्शे-कदम देखते है
खियाबां-खियाबां इरम देखते है

दिल आशुफ्तगा खालें-कुंजे-दहन के
सुवैदा मै सैरे-अदम देखते है

तेरे सरू कामत से एक कद्दे-आदम
क़यामत के फितने को कम देखते है

तमाशा कि ए महे-आईनादारी
तुझे किस तमन्ना से हम देखते है

सुरागे-तुफ़े-नाला ले दागे-दिल से
कि शब् रों का नक़्शे-कदम देखते है

बनाकर फकीरों का हम भेष 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहले-करम देखते है


मायने
खियाबां-खियाबां=क्यारी-क्यारी, इरम=स्वर्ण भूमि, आशुफ्तगा=विचलित ह्रदय-प्रेमी, खालें-कुंजे-दहन=अधर के एक कोने का तिल, सैरे-अदम=संसार का तमाशा, कामत=कद-काठी, कद्दे-आदम=पहले मानव का कद, फितने=उपद्रव, महे-आईनादारी=आत्म श्रंगार, सुरागे-तुफ़े-नाला=आर्तनाद, दागे-दिल=ह्रदय के घाव, शब् रों=रात के राही, नक़्शे-कदम=पदचिन्ह, तमाशा-ए-अहले-करम=कृपालुओ का जमघट

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