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फैज़ अहमद फैज़ का यह वर्ष (2011) जन्म शताब्दी वर्ष है आपको जल्द ही फैज़ पर और उनके जीवन पर आधारित लेख पढ़ने को मिलेंगे फिलहाल फैज़ साहब कि यह नज्म पेश है:

मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग
मैने समझा था कि तू है तो दरख़्शां है हयात
तेरा ग़म है तो गम-ए-दहर का झगड़ा क्या है
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया मे रक्खा क्या है

तू जो मिल जाये तो तक़दीर निगूँ हो जाये
यूँ न था, मैने फ़क़त चाहा था यूँ हो जाये
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहते और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

अनगिनत सदियों से तरीक़ बहीमाना तिलिस्म
रेशम-ओ-अतलस-ओ-कमख़्वाब में बुनवाये हुए
जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ए-बाज़ार में जिस्म
ख़ाक में लिथड़े हुए, ख़ून मे नहलाये हुए
जिस्म निकले हुए अमराज़ के तन्नूरों से
पीप बहती हुई गलते हुए नसूरों से

लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
और भी दुख हैं ज़माने मे मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग-फैज़ अहमद फैज़

मायने
हयात=सुखमय जीवन, गम-ए-दहर=सांसारिक दुःख, सबात=ठहराव, निगूँ=बदल जाना, राहत=मिलन का आनंद, बहीमाना तिलिस्म=क्रूरता का अंधकारमय जाल, रेशम-ओ-अतलस-ओ-कमख़्वाब=कीमती वस्त्र, जा-ब-जा=जगह-जगह, तन्नूरों=बीमारियों कि भट्टी, दिलकश=आकर्षक

Roman

mujhse pahli si mohabbat mere mehboob n mand
maine samjh tha ki tu hai to darkhsha hai hayat
tera gham hai to gham-e-dahar ka jhagda kya hai
teri surat se hai aalam me baharo ko sabat
teri aankho ke siwa duniya me rakkha kya hai

tu jo mil jaye to takdeer nigoon ho jaye
yun n tha, maine fakat chaha tha yun ho jaye
aur bhi dukh hai zamane me mohbbat ke siwa
rahte aur bhi hai wasl ki rahat ke siwa

anginat sadiyo se tarik bahimana tilism
reshm-o-atlas-o-kamkhwab me bunwaye hue
za-b-za bikte hue kuncha-e-bazar me jism
khaq me lithde hue, khoon me nahlaye hue
jism nikle hue amraaz ke tannuro se
pip bahti hui galte hue nasuro se

lout jati hai udhar ko bhi nazar kya keeje
ab bhi dilkash hai tera husn magar kya keeje
aur bhi dukh hai jamane me mohbbat ke siwa
rahte aur bhi hai wasl ki raahat ke siwa
mujh se pahli si mohbbat mere mehboob n mang - Faiz Ahmad Faiz

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