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मैं मसअला हूँ मुझको अभी हल नहीं मिला
सूरज छुपाने वालों को बादल नहीं मिला

तुम दोस्ती के गीत सुनाते तो हो मगर
इस पेड़ में हमें तो कभी फल नहीं मिला

दावा किया था जिसने ख़ुदाई का शहर में
वो आदमी भी हमको मुकम्मल नहीं मिला

काँधे पे सर का बोझ लिए ढूँढता हूँ मैं
मेयार का मेरे कोई मक़तल नहीं मिला

हाथों में चाँद लेके वो आया था एक दिन
फिर उसके बाद मुझको वो पागल नहीं मिला

रेहते हैं दूर दूर जो अहमद निसार से
वो ऐसे साँप हैं जिन्हें सन्दल नहीं मिला -अहमद निसार / Ahmad Nisar

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