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हिजाबे फतना परवर अब उठा लेती तो अच्छा था।
खुद अपने हुस्न को परदा बना लेती तो अच्छा था

तेरी नीची नजर खुद तेरी अस्मत की मुहाफज है।
तू इस नश्तर की तेजी आजमा लेती तो अच्छा था

यह तेरा जर्द रुख, यह खुश्क लब, यह वहम, यह वहशत।
तू अपने सर से यह बादल हटा लेती तो अच्छा था

दिले मजरुह को मजरुहतर करने से क्या हासिल?
तू आँसू पोंछ कर अब मुस्कुरा लेती तो अच्छा था

तेर माथे का टीका मर्द की किस्मत का तारा है।
अगर तू साजे बेदारी उठा लेती तो अच्छा था

तेरे माथे पे यह आँचल बहुत ही खूब है लेकिन।
तू इस आँचल से एक परचम बना लेती तो अच्छा था।- मजाज़ लखनवी

Roman

hijabe fatna parvar ab utha leti to achha tha
khud apne husn ko parda bana leti to achcha tha

teri nichi nazar khud teri asmat ki muhafaz hai
tu is nashtar ki teji aajma leti to achcha tha

ya tera jard rukh, yah khushq lab, yah waham, yah wahshat
tu apne sar se yah badal hata leti to achcha tha

dile majruh ko majruhtar karne se kya hasil?
tu aansu poch kar ab muskura leti to achcha tha

tere mathe ka tika mard ki kismat ka tara hai
agar tu saje bedari utha leti to achcha tha

tere mathe pe yah aanchal bahut hi khub hai lekin
tu is aanchal se ek parcham bana leti to achcha tha - Majaz Lakhnavi

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