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बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे

ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी परेशां क्यूं हो
उगलियां उठेंगी सूखे हुए बालों की तरफ

इक नज़र देखेंगे गुज़रे हुए सालों की तरफ
चूड़ियों पर भी कई तन्ज़ किये जायेंगे

कांपते हाथों पे भी फिकरे कसे जायेंगे ,
लोग ज़ालिम हैं हर इक बात का ताना देंगे

बातों बातों मे मेरा ज़िक्र भी ले आयेंगे
उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना

वर्ना चेहरे के तासुर से समझ जायेंगे
चाहे कुछ भी हो सवालात न करना उनसे

मेरे बारे में कोई बात न करना उनसे
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी -कफ़ील आज़र

Roman

Bat niklegi to fir door talak jayegi
log bewajah udasi ka sabab puchenge

ye bhi puchenge ki tum itni paresha kyo ho
ungliya uthegi sukhe hue balo ki taraf

ik nazar dekhenge gujre hue salo ki taraf
chudiyo par bhi kai tanj kiye jayenge

kapte haatho pe bhi fikre kase jayenge
log jalim hai har ik bat ka tana denge

bato bato me mera zikra bhi le aayenge
unki bato ka zara sa bhi asar mat lena

warna chehre ke tasur se samajh jayenge
chahe kuch bhi ho sawalat n karna unse

mere bare me koi bat n karna unse
bat niklegi to phir door talak jayegi - kafeel Aazer

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  1. bahut he aacha laga post aapka mujhe ! have a good day !visit my blog 2

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