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दिल मेरा सोजे-निहा से बेमहाबा जल गया

आतिशे-खामोश की मानिंद गोया जल गया

दिल में जौके-वस्लो-यादे-यार तक बाकी नहीं

आग इस घर को लगी ऐसी की जो था जल गया

मै अदम से भी परे हु वर्ना गाफिल बारहा

मेरी आहे-आतशी से बाले-अन्का जल गया

अर्ज़ कीजे जौहरे-अंदेशा की गर्मी कहा !

कुछ ख्याल आया था वहशत का कि सहरा जल गया

दिल नहीं, तुझको दिखता हु वर्ना दागो कि बहार

इस चिरागां का करू क्या, कारफ़र्मा जल गया

मै हु और अफ़सुर्दगी कि आरजू 'ग़ालिब' कि दिल

देखकर तर्जे-तपाके अहले-दुनिया जल गया

मायने

सोजे-निहा=भीतर कि जलन, बेमहाबा=एकदम, जौके-वस्लो-यादे-यार=महबूब से मिलने कि चाह, अदम=अस्तित्वहीनता, आहे-आतशी=जलती हुई आह, बाले-अन्का=अन्का नामक पंछी का पंख, जौहरे-अंदेशा=विचारो कि गर्मी, वहशत=बियाबान, चिरागां=दीपमाला, कारफ़र्मा=कार्यकर्त्ता, अफ़सुर्दगी=उदास, तर्जे-तपाके=व्यवहार का ढंग

मिर्ज़ा ग़ालिब के लेखो से खुद को अपडेट रखने के लिए क्या आपने ब्लॉग को सब्सक्राइब किया अगर नहीं तो इसे फीड या ई-मेल के जरिये सब्सक्राइब कीजिये |


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