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तू दोस्त किसी का भी सितमगर न हुआ था
औरो पे है वो जुल्म की मुझ पर न हुआ था

छोड़ा महे-नखशब की तरह दस्ते-क़ज़ा ने
खुर्शीद हनोज उसके बराबर न हुआ था

तौफिक बअन्दाजा-ए-हिम्मत है अजल से
आँखों में है वो कतरा की गौहर न हुआ था

जब तक की न देखा था कदे-यार का आलम
मै मोअतकीदे-फितना-ए-महशर न हुआ था

मै सदा-दिल, आजुर्दगी-ए-यार से खुश हू
यानि सबके-शौक मुकर्रर न हुआ था

दरिया-ए-मआसी तंग-आबी से हुआ खुश्क
मेरा सरे-दामन भी अभी तर न हुआ था

जारी थी 'असद' दागे-जिगर से मेरे तहसील
आतिशकदा जागीरे-समंदर न हुआ था

मायने
महे-नखशब=कत्रिम चाँद, दस्ते-क़ज़ा, खुर्शीद=सूरज, तौफिक=सामर्थ्य, बअन्दाजा-ए-हिम्मत=साहस के अनुरूप, अजल=सृष्टि का आरम्भ, मोअतकीदे-फितना-ए-महशर=क़यामत का फितना माननेवाला, आजुर्दगी-ए-यार=यार की उदासी, सबके-शौक=प्रेम का पाठ,  दरिया-ए-मआसी=पाप की नदी, तंग-आबी=पानी की कमी, सरे-दामन=दामन का सिरा, तहसील=प्राप्ति

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