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आसुओ से धुली ख़ुशी की तरह
रिश्ते होते है शायरी की तरह

जब कभी बादलो में घिरता है
चाँद लगता है आदमी की तरह

सब नजर का फरेब है वरना
कोई होता नहीं किसी की तरह

खुबसूरत, उदास, खौफजदा
वो भी है बीसवी सदी की तरह

जानता हू की एक दिन मुझको
वक़्त बदलेगा डायरी की तरह
                            - बशीर बद्र
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