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ख़त है या बदलती रूत, या गीतों भरा सावन
इठलाती हुई गलिया, शरमाते हुए आँगन

शीशे-सा धुला चौका, मौती से चुने बर्तन
खिलता हुआ एक चेहरा, हँसते हुए सौ दर्पण

सिमटी हुई चौखट पर, कुछ धुप गिलहरी सी
नींबू की क्यारी में, चाँदी के कई कंगन

बच्चो-सी हुमकती शब्, गेंदों से उछलते दिन
चेहरों-सी धुली खुशिया, बालो सी खुली उलझन

हर पेड़ कोई किस्सा, हर घर कोई अफसाना
हर रास्ता पहचाना, हर चेहरे पे अपनापन - निदा फ़ाज़ली

Roman
khat hai ya badlati rut, ya geeto bhara sawan
ithlati hui galiya, sharmate hue aangan

shishe sa dhula chouka, moti se chune bartan
khilta hua ek chehra, haste hue sou darpan

simti hui choukhat par, kuch dhoop gilhari si
nimbu ki kyari me, chandi ke kai kangan

bachcho si humkati shab, gendo se uchlate din
chehre si dhuli khushiya, balo si khuli uljhan

har ped koi kissa, har ghar koi afsana
har rasta pahchana, har chehre pe apnapan - Nida Fazli

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