0
अच्छा जो खफा हम से हो तुम ए सनम अच्छा
लों हम भी न बोलेंगे खुदा की कसम अच्छा

गमी ने कुछ आग और ही सीने में लगा दी
हर तौर गरज आप आप से मिलना है कम अच्छा

अगयार से करते हो मिरे सामने बाते
मुझ पर ये लगे करने तुम सितम अच्छा

कह कर गए, आता हू कोई दम में, मै तुम पास
फिर दे चले कल की सी तरह मुझ को दम अच्छा

इस हस्ती-ए-मौहूम से मै तंग हू 'इंशा'
वल्लाह की इस से बमरातिब अदम अच्छा- इंशा अल्लाह खाँ इंशा
मायने
अगयार=गैरो, हस्ती-ए-मौहूम=निस्सार जीवन, बमरातिब=अपेक्षाकृत, अदम=अपेक्षा

Post a Comment Blogger

 
Top