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उठो और उठ के निजामे जहा बदल डालो
यह आशमा,यह ज़मी, यहाँ मकाँ बदल डालो

यह बिजलिया है पुरानी, यह बिजलिया फूको
यह आशिया है कदीम, आशिया बदल डालो

गुलो के रंग में आग, पंखुड़ी में शराब
कुछ इस तरह रविशे गुलसिता बदल डालो

निजामे काफिला बदला तो क्या कमाल किया
मिजाजे राह्बरे कारवा बदल डालो

हयात कोई कहानी नहीं हकीकत है
इस एक लफ्ज़ से कुल दस्ता बदल डालो
                                          - साग़र निज़ामी
मायने
निजामे-जहा=विश्व व्यवस्था, आशिया=घोसला, कदीम=पुराना, गुल=फुल, रविश=उद्यान के बीच का पथ, तरीका, राह्बरे कारवा=करवा का पथ पदर्शक, हयात=जीवन
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  1. पढ़कर और सुनकर आनन्द आ गया...बहुत आभार.

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