0
नाम आए तो सारा तन महके
जिक्र से तेरे अंजुमन महके

सरहदों पर तुम्हारे कदमो की
धुल उड़े और यह वतन महके

खौफ तुझको नहीं कांटो का
तेरे पैरो की हर चुभन महके

तू ज़माने में सर्बुलंद रहे
और मर जाए तो कफ़न महके

ए शहीदे-वतन क़यामत तक
तेरी मिटटी, तेरा कफ़न महके

जीत की जब सुने खबर अज़ीज़
उसका दिल झूमे, तन-बदन महके
                                    -अज़ीज़ अंसारी
क्या आपने इस ब्लॉग(जखीरा) को सब्सक्राइब किया है अगर नहीं तो इसे फीड या ई-मेल के द्वारा सब्सक्राइब करना न भूले |

Post a Comment Blogger

 
Top