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अभी तो मै जवान हू  !

हवा भी खुशगवार है गुलो पे भी निखार है
तरन्नुम हजार है बहार पुरबहार है

कहा चला है साक़िया 
इधर तो लौट इधर तो आ
अरे ये देखता है क्या 
उठा सुबू, सुबू उठा

सुबू उठा, प्याला भर, प्याला भर के दे इधर
चमन की सिम्त कर नज़र समा तो देख बेखबर 

वो काली-काली बदलिया
उफक पे हो गई अया
वो एक हुजुमे-मैकशा
है सु-ए-मैकदा रवा

ये क्या गुमा है बदगुमा समझ न मुझको नातुवा

खयाले-जुहद अभी कहा
अभी तो मै जवान हू !

न ग़म कशुदो-बस्त का, बुलंद का न पस्त का
न बुद का न हस्त का न वादा-ए-असस्त का

उमीद और यास गुम 
हवास गुम कयास गुम
नज़र से आस-पास गुम
हमा, बजुज़ गिलास गुम

न मय में कुछ कमी रहे कदह से हमदमी रहे
नशिस्त ये ज़मी रहे यही हुमाहुमी रहे

वो राग छेड़ मुतरिबा
तरबफज़ा, अलमरुबा
असर सदा-ए-साज का
जिगर में आग दे लगा

हर एक लब पे हो सदा, न हाथ रोक साक़िया

पिलाए जा पिलाए जा
अभी तो मै जवान हू !
                                                   - हफ़ीज़ जालंधरी
मायने
तरन्नुम=संगीत, सुबू=सुराही, सिम्त=और, समा=समय, उफक=क्षितिज, अयाँ=प्रकट, हुजुमे-मैकशा=मद्यपो का समूह, सु-ए-मैकदा रवा=मधुशाला की और जा रहा हू, नातुवा=दुर्बल, ख्याले-जुहद=इन्द्रियनिग्रह का विचार, कशुदो-बस्त=खोलने बंधने, बुद=संभावना, हस्त=अस्तित्व, वादा-ए-असस्त=आदिकाल का प्रण, हमा=सभी कुछ, बजुज़=सिवाय, कदह=प्याला, नशिस्त=महफ़िल, मुतरिबा=गायिका, तरबफज़ा=आनंदवर्धक, अलमरुबा=शौक को उड़ा देने वाला, सदा-ए-साज=साज की आवाज

Roman

abhi to mai jawan hu !
hawa bhi khushgawar hai gulo pe bhi nikhar hai
tarnnum hajaar hai bahar purbahar hai

kaha chala hai sakiya
idhar to lout idhar to aaa
are ye dekhta hai kya
utha subu, subu utha

subu utha, pyala bhar, pyala bhar ke de idhar
chaman ki simt kar nazar sama to dekh bekhabar

wo kali kali badliya
ufaq pe ho gayi aya
wo ek hujume-maiksha
hai su-e-maikda rawa

ye kya guma hai badguma, samjh n mujhko natwa

khyale-juhad abhu kaha
abhi to mai jawaan hu !

na gam kshudo-bast ka, n past ka
n bud ka n hast ka, n waada-e-asast ka

ummid aur yaas gum
hawas gum kayas gum
najar se aas-paas gum
hama, bazuz gilas gum

n may me kuch kami rahe kadah se hamdami rahe
nashist ye jami rahe, yahi humahumi rahe

wo raag chhed mutriba
tarabfza, alamruba
asar sada-e-saaj ka
jigar me aag de laga

har ek lab pe ho sada, n haath rok sakiya
pilaye ja pilaye ja

abhi to mai jawaan hu ! - Hafeez Jalandhari

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  1. वाह भाई बहुत खूब बढ़िया प्रस्तुति.... बधाई

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