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हम भरे शहरो में भी तन्हा है जाने किस तरह  - अहमद फ़राज़
हम भरे शहरो में भी तन्हा है जाने किस तरह - अहमद फ़राज़

तुम जमाना-आशना, तुमसे जमाना ना-आशना और हम अपने लिए भी अजनबी, ना-आशना रास्ते भर कि रिफाक़त भी बहुत है जानेमन वरना मंजिल पर पहुच कर कौन...

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नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब - कुवर बैचैन
नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब - कुवर बैचैन

नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब जख्म देते है उन्हें और टूटते जाते है ख्वाब आप चाहे तो हमारी पुतलियो से पूछ लों हमने यादो की ...

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उसकी आँखों को गौर से देखो - बशीर बद्र
उसकी आँखों को गौर से देखो - बशीर बद्र

बेवफा रास्ते बदलते है हमसफ़र साथ चलते है किसके आसू छिपे है फूलो में चूमता हू तो होठ जलते है उसकी आँखों को गौर से देखो मंदिरों में चराग...

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अजीब शख्स है बातो में टाल देता है - नसीम निकहत
अजीब शख्स है बातो में टाल देता है - नसीम निकहत

कोई हसीन सा नुक्ता निकल देता है अजीब शख्स है बातो में टाल देता है अब और इससे ज्यादा जवाब क्या देगा मेरे खुतूत वह दरिया में दाल देता ...

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क्यों किसी और को दुख-दर्द सुनाऊ अपने - अनवर मसउद
क्यों किसी और को दुख-दर्द सुनाऊ अपने - अनवर मसउद

क्यों किसी और को दुख-दर्द सुनाऊ अपने अपनी आखो में भी मै जख्म छुपाऊ अपने मै तो कायम हू तेरे ग़म की बदोलत वरना यु बिखर जाऊ कि खुद हाथ न आ...

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वो दिन गए की कहते थे नौकर नहीं हू मै
वो दिन गए की कहते थे नौकर नहीं हू मै

दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हू मै खाक ऐसी जिन्दगी पे की पत्थर नहीं हू मै क्यों गर्दिशे-मुदाम से घबरा न जाए दिल ? इंसान हू, प्याला-ओ-स...

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वो भी आखिर मिल गया अब क्या करे - बशीर बद्र
वो भी आखिर मिल गया अब क्या करे - बशीर बद्र

अब किसे चाहे किसे ढूंढा करे वो भी आखिर मिल गया अब क्या करे हलकी-हलकी बरिशे होती रहे हम भी फूलो की तरह भीगा करे आँख मुंद इस गुलाबी धुप ...

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ज्यादातर मुसाफ़िर को मुसाफ़िर लुट जाते है - अशोक मिज़ाज
ज्यादातर मुसाफ़िर को मुसाफ़िर लुट जाते है - अशोक मिज़ाज

कभी खुद अपने हाथो से प्याले टूट जाते है कभी पीने पिलाने मे ये शीशे टूट जाते है हम इस धरती के वासी है अगर टूटे तो क्या ग़म है फलक पर ह...

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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मै अदा कर ही नहीं सकता - मुनव्वर राना
ये ऐसा क़र्ज़ है जो मै अदा कर ही नहीं सकता - मुनव्वर राना

बुलंदी देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती है बहुत उची ईमारत हर घडी खतरे में रहती है बहुत जी चाहता है कैद -ए-जा से हम निकल जाए तुम्हारी य...

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अभी तो मै जवान हू - हफ़ीज़ जालंधरी
अभी तो मै जवान हू - हफ़ीज़ जालंधरी

अभी तो मै जवान हू  ! हवा भी खुशगवार है गुलो पे भी निखार है तरन्नुम हजार है बहार पुरबहार है कहा चला है साक़िया  इधर तो लौट इधर त...

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मुझ में कोई चीख उठता है, नहीं ऐसा नहीं - खुर्शीद रिज़वी
मुझ में कोई चीख उठता है, नहीं ऐसा नहीं - खुर्शीद रिज़वी

जब कभी मै खुद को समझाऊ कि तू मेरा नहीं मुझ में कोई चीख उठता है, नहीं ऐसा नहीं कब निकलता है कोई, दिल में उतर जाने के बाद इस गली के दूसरी ...

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बैठे-बैठे क्या बताऊ, क्या मुझ को याद आ गया - हमीद जालंधरी
बैठे-बैठे क्या बताऊ, क्या मुझ को याद आ गया - हमीद जालंधरी

आ के वो मुझ खस्ता-जा पर यु करम फरमा गया कोई दम बैठा, दिले नाशाद को बहला गया कौन ला सकता है ताब उसके रूखे-पुरनूर कि जिस तरफ से हो के गुजर...

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ये जिन्दगी आज जो तुम्हारे  - निदा फ़ाज़ली
ये जिन्दगी आज जो तुम्हारे - निदा फ़ाज़ली

ये जिन्दगी आज जो तुम्हारे बदन की छोटी बड़ी नसों में मचल रही है तुम्हारे पैरो से चल रही है तुम्हारी आवाज में गले से निकल रही है तुम्हारे...

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बहते आसू सबने देखे, दर्द न कोई जान सका  - नसीम अजमेरी
बहते आसू सबने देखे, दर्द न कोई जान सका - नसीम अजमेरी

आँखों से जो दूर थे पहले, दिल से भी अब दूर हुए वार तेरे तो गर्दिशे-दौरा, जब भी हुए भरपूर हुए लौट गई यु खुशिया आकार, जैसे देखा कोई ख्वाब उ...

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रातो को दिन बनाए जमाने गुजर गए - खुमार बारंबकवी
रातो को दिन बनाए जमाने गुजर गए - खुमार बारंबकवी

पी-पी के जगमगाए ज़माने गुजर गए रातो को दिन बनाए जमाने गुजर गए ए मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुजर गए आजा के जहर खाए ज़माने गुजर गए ओ जाने वाले...

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साए से मगर उसको मुहब्बत भी बहुत थी- परवीन शाकिर
साए से मगर उसको मुहब्बत भी बहुत थी- परवीन शाकिर

रस्ता भी कठिन, धुप में शिद्दत भी बहुत थी साए से मगर उसको मुहब्बत भी बहुत थी   खेमे न कोई मेरे मुसाफ़िर के जलाए जख्मी था बहुत पाँव, मुसाफ...

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ए फलक चाहिए जी भर के नजारा हमको - दाग देहलवी
ए फलक चाहिए जी भर के नजारा हमको - दाग देहलवी

ए फलक चाहिए जी भर के नजारा हमको जा के आना नहीं दुनिया में दोबारा हमको हम किसी जुल्फे-परेशा की तरह ए तक़दीर खूब बिगड़े थे मगर खूब सवारा हम...

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ऐसा लगता है कि ये उम्र पहन आया है - अशोक मिज़ाज
ऐसा लगता है कि ये उम्र पहन आया है - अशोक मिज़ाज

ऐसा लगता है कि ये उम्र पहन आया है अब मेरे सर पे भी कुछ रंगे कफ़न आया है उम्र मर-मर के गुजारी है, अभी तक हमने अब कहा कही जा के हमें जीन...

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मत परेशा करो बहारो को - सरदार अंजुम
मत परेशा करो बहारो को - सरदार अंजुम

दे के आवाज़ ग़म के मारो को मत परेशा करो बहारो को इनसे शायद मिले सुरागे-हयात आओ सजदा करे मजारो को वो खिज़ा से है आज शर्मिंदा जिसने रुसव...

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आईना टूट गया तेरी नजर होने तक - कृष्ण बिहारी नूर
आईना टूट गया तेरी नजर होने तक - कृष्ण बिहारी नूर

धुन ये है आम तेरी रहगुज़र होने तक हम गुजार जाए ज़माने को खबर होने तक मुझको अपना जो बनाया है, तो एक और करम बेखबर कर दे ज़माने को खबर होने त...

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ख़त है या बदलती रूत - निदा फ़ाज़ली
ख़त है या बदलती रूत - निदा फ़ाज़ली

ख़त है या बदलती रूत, या गीतों भरा सावन इठलाती हुई गलिया, शरमाते हुए आँगन शीशे-सा धुला चौका, मौती से चुने बर्तन खिलता हुआ एक चेहरा, हँ...

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वो शहर, वो कूचा, वो मका याद रहेगा - इब्ने इंशा
वो शहर, वो कूचा, वो मका याद रहेगा - इब्ने इंशा

उस शाम वो रुखसत का समा याद रहेगा वो शहर, वो कूचा, वो मका याद रहेगा वो टीस की उभरी थी इधर याद रहेगा वो दर्द की उभरा थी उधर याद रहेगा ...

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जिसे तुने चाहा वो मिल गया, जिसे मैंने चाहा मिला नहीं - बशीर बद्र
जिसे तुने चाहा वो मिल गया, जिसे मैंने चाहा मिला नहीं - बशीर बद्र

सारे राह कुछ भी कहा नहीं, कभी उसके घर में गया नहीं मै जनम जनम से उसी का हू, उसे आज तक ये पता नहीं उसे पाक नजरो से चूमना भी इबादतों में शु...

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कल धुप भी दिवार पर पूरी नहीं उतरी - मुनव्वर राना
कल धुप भी दिवार पर पूरी नहीं उतरी - मुनव्वर राना

उम्मीद भी किरदार पर पूरी नहीं उतरी, ये शब् दिल-ए-बीमार पर पूरी नहीं उतरी क्या खौफ का मंजर था तेरे शहर में कल रात, सच्चाई भी अखबार पर ...

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सदाए देनी थी जिसको, उसे सदाए न दी - अख्तर नज्मी
सदाए देनी थी जिसको, उसे सदाए न दी - अख्तर नज्मी

सदाए देनी थी जिसको, उसे सदाए न दी मेरे नसीब ने फिर कम मुझे सजाए न दी मिली है विरसे में मुझको कलंदराना रविश मुझे कभी किसी दरवेश ने दुआए न...

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अभी यह खेल तलातुम बहुत दिखाएगा - मंज़ूर हाशमी
अभी यह खेल तलातुम बहुत दिखाएगा - मंज़ूर हाशमी

अभी यह खेल तलातुम बहुत दिखाएगा कभी डुबोएगा मुझको कभी बचाएगा तिलिस्मे-कोहे-निदा जब भी टूट जाएगा तो कारवाने-सदा भी पलट जाएगा खिंची रहेगी...

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देखा है जब भी आईना महसूस यु हुआ - जाज़िब आफ़ाकी
देखा है जब भी आईना महसूस यु हुआ - जाज़िब आफ़ाकी

आदत नहीं, करे जो शिकायत किसी से हम करते जरुर वरना कभी आपही से हम देखा है जब भी आईना महसूस यु हुआ वाकिफ हुए है जैसे किसी अजनबी से हम...

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जिधर आँख पड़ती है , तू रूबरू है - बहादुर शाह जफ़र
जिधर आँख पड़ती है , तू रूबरू है - बहादुर शाह जफ़र

जिधर आँख पड़ती है , तू रूबरू है तेरा जलवा सब में है सब जाय तू है मेरी चश्म में क्या है? तेरा तसव्वुर मेरे दिल में क्या है? तेरी आरजू ह...

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कोई दिन गर ज़िंदगानी और है
कोई दिन गर ज़िंदगानी और है

कोई दिन गर ज़िंदगानी और है अपने जी में हमने ठानी और है आतिश-ए-दोज़ख़ में ये गर्मी कहाँ सोज़-ए-ग़महा-ए-निहानी और है बारहा देखीं हैं उनकी रंजि...

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भरी बरसात में जिस दम बादल घिर के आते है  - जोश मलीहाबादी
भरी बरसात में जिस दम बादल घिर के आते है - जोश मलीहाबादी

भरी बरसात में जिस दम बादल घिर के आते है बुझा कर चाँद के मशाल सियाह परचम उड़ाते है मकाँ के बमों-दर बिजली की रौ में जब झलकते है सुबुक बू...

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तेरी गली तक तो हमने देखा - नासिर काज़मी
तेरी गली तक तो हमने देखा - नासिर काज़मी

गए दिनों का सुराग लेकर किधर से आया, किधर गया वो अजीब मानुस अजनबी था, मुझे तो हैरां कर गया वो न अब वो यादो का चढ़ता दरिया, न फुर्सतो की उदा...

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सबकी हालत एक है नादा - फ़िराक गोरखपुरी
सबकी हालत एक है नादा - फ़िराक गोरखपुरी

सबकी हालत एक है नादा कौन है गमगी, कौन है शादाँ उसका पाना है वह करिश्मा सोच तो मुश्किल, देख तो आसा बादाकशो को फिक्र है जिसकी बादा न...

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परवाज में कुछ है - बिस्मिल भरतपुरी
परवाज में कुछ है - बिस्मिल भरतपुरी

परवाज में कुछ है, कोई पर तोल रहे है, उड़ जायेंगे पंछी जो यहाँ बोल रहे है | करते है तुझे याद, जो ले-ले के तेरा नाम, हमराज़ ही सब राज़ तेर...

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हमें भी आ पड़ा है दोस्तों से कुछ काम - पंडित हरिचंद अख्तर
हमें भी आ पड़ा है दोस्तों से कुछ काम - पंडित हरिचंद अख्तर

शबाब आया किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया मेरी दुनिया में बन्दे के खुदा होने का वक़्त आया उन्हें देखा तो जाहिद ने कहा, ईमान की यह है...

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उजला-उजला चाँद - निदा फ़ाज़ली
उजला-उजला चाँद - निदा फ़ाज़ली

नील गगन में तैर रहा है, उजला-उजला चाँद किन आँखों से देखा जाए, चंचल चेहरे जैसा चाँद मुन्नी की भोली बातो-सी चटकी तारो की कलियाँ पप्पू क...

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चाँद खिड़की में अकेला होगा - बशीर बद्र
चाँद खिड़की में अकेला होगा - बशीर बद्र

शाम से रास्ता तकता होगा चाँद खिड़की में अकेला होगा धुप की शाख पे तन्हा-तन्हा वो मोहब्बत का परिंदा होगा नींद में डूबी महकती साँसे ख्व...

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जिक्र उस परी-वश का और फिर बयां अपना
जिक्र उस परी-वश का और फिर बयां अपना

जिक्र उस परी-वश का और फिर बयां अपना बन गया रकीब आखिर, था जो राजदा अपना मै वो क्यों बहुत पीते बज्मे-गैर में, यारब आज ही हुआ मंजूर उनको इन्तहा...

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बसके दुशवार है हर काम का आसां होना
बसके दुशवार है हर काम का आसां होना

बसके दुशवार है हर काम का आसां होना | आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसा होना || गिरया चाहे है खराबे मेंरे काशाने की | दरो-दिवार से टपके है बयाबां ह...

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हमें मालूम था जुडती नहीं टूटी हुई चीजे - हस्तीमल हस्ती
हमें मालूम था जुडती नहीं टूटी हुई चीजे - हस्तीमल हस्ती

ये मुमकिन है की मिल जाए तेरी खोई हुई चीज़े करीने से सजाकर रख ज़रा बिखरी हुई चीजे कभी यु भी हुआ है, हँसते-हँसते तोड़ दी हमने हमें मालूम था ...

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ये बात फ़कत हम समझे है - जाज़िब आफ़ाकी
ये बात फ़कत हम समझे है - जाज़िब आफ़ाकी

ये बात फ़कत हम समझे है या दीदा-ए-जाना जाने है दीदार को इतना होश तो है, आईने को हैराँ जाने है ए काश कोई खुद आ के कभी इस वहम को दिल से दूर...

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हमें फरियाद की आदत है, हम फरियाद करते है - सरस्वती सरन कैफ़
हमें फरियाद की आदत है, हम फरियाद करते है - सरस्वती सरन कैफ़

सितमगर तुझसे हम कब शिकवा-ए-बेदाद करते है हमें फरियाद की आदत है, हम फरियाद करते है हवाओ ! एक पल के वास्ते लिल्लाह रुक जाओ वो मेरी अर्ज़ प...

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जिन्दगी भर दोस्तों में अजनबी बनकर रहा - संजय ग्रोवर
जिन्दगी भर दोस्तों में अजनबी बनकर रहा - संजय ग्रोवर

मौत की वीरानियो में जिन्दगी बनकर रहा वो खुदाओ के शहर में आदमी बनकर रहा जिन्दगी से दोस्ती का ये सिला उसको मिला जिन्दगी भर दोस्तों में अजन...

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थी अपनी हद में धुल, अभी कल की बात है  - हस्तीमल हस्ती
थी अपनी हद में धुल, अभी कल की बात है - हस्तीमल हस्ती

थी अपनी हद में धुल, अभी कल की बात है राहों के थे उसूल, अभी कल की बात है काफी थी एक ठेस बिखरने के वास्ते इंसान भी थे फुल, अभी कल की बात ह...

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थकन से चूर परिंदा न जाने किसके लिए - मज़ूर हाशमी
थकन से चूर परिंदा न जाने किसके लिए - मज़ूर हाशमी

कटी-फटी हुई तहरीर ले के आया था अजब नविश्ता-ए-तक़दीर ले के आया था थकन से चूर परिंदा न जाने किसके लिए लहू में डूबा तीर ले के आया था तमाम ...

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कितने मौसम सरगर्दा थे, मुझसे हाथ मिलाने में- अज्म बहजाद
कितने मौसम सरगर्दा थे, मुझसे हाथ मिलाने में- अज्म बहजाद

कितने मौसम सरगर्दा थे, मुझसे हाथ मिलाने में मैंने शायद देर लगा दी, खुद से बाहर आने में बिस्तर से करवट का रिश्ता टूट गया एक याद के साथ ख्...

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न हम होते तो क्या होता - नौशाद लखनवी
न हम होते तो क्या होता - नौशाद लखनवी

न मंदिर में सनम होते, न मस्जिद में खुदा होता हमी से ये तमाशा है, न हम होते तो क्या होता न ऐसी मंजिले होती, न ऐसा रास्ता होता संभल कर हम ...

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अच्छा जो खफा हम से हो  - इंशा अल्लाह खाँ इंशा
अच्छा जो खफा हम से हो - इंशा अल्लाह खाँ इंशा

अच्छा जो खफा हम से हो तुम ए सनम अच्छा लों हम भी न बोलेंगे खुदा की कसम अच्छा गमी ने कुछ आग और ही सीने में लगा दी हर तौर गरज आप आप से म...

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कौन कहता है मौत आई तो मर जाऊँगा - अहमद नदीम कासमी
कौन कहता है मौत आई तो मर जाऊँगा - अहमद नदीम कासमी

कौन कहता है मौत आई तो मर जाऊँगा मै तो दरिया हू, समंदर में उतर जाऊँगा तेरा दर छोड़ के मै और किधर जाऊंगा घर में घिर जाऊँगा, सहरा में बिखर ज...

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सितम भी करता है, उसका सिला भी देता है - मुश्फ़िक ख्वाज़ा
सितम भी करता है, उसका सिला भी देता है - मुश्फ़िक ख्वाज़ा

सितम भी करता है, उसका सिला भी देता है की मेरे हाल पे वह मुस्कुरा भी देता है शिनावरो को उसी ने डुबो दिया शायद जो डूबता को किनारे लगा भी द...

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न शाम है न सवेरा, अजब दयार में हू  - अतहर नफीस
न शाम है न सवेरा, अजब दयार में हू - अतहर नफीस

न शाम है न सवेरा, अजब दयार में हू मै एक अरसए बेरंग के हिसार में हू सिपाहे गैर ने कब मुझको जख्म-जख्म किया मै आप अपनी ही साँसों के कारज़ार ...

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लहू हमारा दिसंबर में जून चाहता है - फ़ारुक़ अंजुम
लहू हमारा दिसंबर में जून चाहता है - फ़ारुक़ अंजुम

हमारा दिल तो मुकम्मल सुकून चाहता है मगर ये वक्त की हमसे जूनून चाहता है अब इस बहिश्त को मकतल का नाम दे दीजे की अब ये खितए-कश्मीर, खून चाह...

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प्यार को सदियों के, एक लम्हे की नफ़रत खा गई - अनवर जलालपुरी
प्यार को सदियों के, एक लम्हे की नफ़रत खा गई - अनवर जलालपुरी

प्यार को सदियों के, एक लम्हे की नफ़रत खा गई इक इबादतगाह यह गन्दी सियासत खा गई मुस्तक़िल फांको ने चेहरों की बशाशत छीन ली फुल-से मासूम बच्च...

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तेरे पैरो की हर चुभन महके  - अज़ीज़ अंसारी
तेरे पैरो की हर चुभन महके - अज़ीज़ अंसारी

नाम आए तो सारा तन महके जिक्र से तेरे अंजुमन महके सरहदों पर तुम्हारे कदमो की धुल उड़े और यह वतन महके खौफ तुझको नहीं कांटो का तेरे पैरो...

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शायरे फितरत हू मै - जिगर मुरादाबादी
शायरे फितरत हू मै - जिगर मुरादाबादी

शायरे फितरत हू मै, जब फिक्र फरमाता हू मै रूह बन कर जर्रे-जर्रे में समां जाता हू मै आ की तुझ बिन इस तरह से दोस्त घबराता हू मै जैसे हर शय ...

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हस के बोला करो, बुलाया करो - अब्दुल हमीद अदम
हस के बोला करो, बुलाया करो - अब्दुल हमीद अदम

हस के बोला करो, बुलाया करो आप का घर है, आया जाया करो मुस्कराहट है हुस्न का जेवर रूप बढ़ता है, मुस्कुराया करो हद से बढ़ कर हसीन लगते हो ...

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आईना झूठ बोलता ही नहीं -कृष्ण बिहारी नूर
आईना झूठ बोलता ही नहीं -कृष्ण बिहारी नूर

ज़िन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं, और क्या ज़ुर्म है पता ही नहीं. इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं. सच घटे या ...

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रूखो के चंद लबो के गुलाब मांगे है - जां निसार अख्तर
रूखो के चंद लबो के गुलाब मांगे है - जां निसार अख्तर

रूखो के चंद लबो के गुलाब मांगे है बदन की प्यास बदन की शराब मांगे है मै कितने लम्हे न जाने कहा गवा आया तेरी निगाह तो सारा हिसाब मांगे ...

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बदल डालो - साग़र निज़ामी
बदल डालो - साग़र निज़ामी

उठो और उठ के निजामे जहा बदल डालो यह आशमा,यह ज़मी, यहाँ मकाँ बदल डालो यह बिजलिया है पुरानी, यह बिजलिया फूको यह आशिया है कदीम, आशिया बदल ड...

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दुनिया में हूँ दूनिया का तलबगार नहीं हू - अकबर इलाहबादी
दुनिया में हूँ दूनिया का तलबगार नहीं हू - अकबर इलाहबादी

दुनिया में हूँ दूनिया का तलबगार नहीं हू बाज़ार से गुज़ारा हू खरीदार नहीं हू जिंदा हू मगर जीस्त की लज्जत नहीं बाकी हर चंद की हू होश में होश...

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छोड़ के मेरा घर वो, किस के घर जाएगा  - सरदार अंजुम
छोड़ के मेरा घर वो, किस के घर जाएगा - सरदार अंजुम

छोड़ के मेरा घर वो, किस के घर जाएगा दर्द को और न समझाओ, वो मर जाएगा दानिश्वर ! ये तेरी खिरद का खेल नहीं दिल ने जो भी करना है, वो कर जाएग...

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दिल में ख्याल आए बहुत - मख्मूर सईदी
दिल में ख्याल आए बहुत - मख्मूर सईदी

नज़र के सामने कुछ अक्स झिलमिलाए बहुत हम उनसे बिछड़े तो दिल में ख्याल आए बहुत थी उनको डूबता सूरज से निस्बते कैसी ढली जो शाम तो कुछ लोग याद...

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तू नहीं है तो कहा हू मै भी - मुहम्मद अल्वी
तू नहीं है तो कहा हू मै भी - मुहम्मद अल्वी

सच तो यह है की गुम हू मै भी तू नहीं है तो कहा हू मै भी जिनमे जल बुझ गये अहबाब मेरे उन मकानों का धुआ हू मै भी याद करता हू पुरानी बाते ...

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