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मैं और मेरी तन्हाई - अली सरदार जाफ़री
मैं और मेरी तन्हाई - अली सरदार जाफ़री

आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तनहाई जाएँ तो कहाँ जाएँ हर मोड़ पे रुसवाई ये फूल से चहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते कोई भी नहीं अपना बेगान...

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चेहरा मेरा था निगाहें उस की- परवीन शाकिर
चेहरा मेरा था निगाहें उस की- परवीन शाकिर

चेहरा मेरा था निगाहें उस की ख़ामुशी में भी वो बातें उस की मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गईं शेर कहती हुई आँखें उस की शोख़ लम्हों का पता दे...

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क्या दिन थे यारो वह भी थे जबकि भोले भाले - नज़ीर अकबराबादी
क्या दिन थे यारो वह भी थे जबकि भोले भाले - नज़ीर अकबराबादी

क्या दिन थे यारो वह भी थे जबकि भोले भाले । निकले थी दाई लेकर फिरते कभी ददा ले ।। चोटी कोई रखा ले बद्धी कोई पिन्हा...

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किसी तरह वहाँ जा निकले - तुर्फैल चर्तुवेदी
किसी तरह वहाँ जा निकले - तुर्फैल चर्तुवेदी

काश उससे मेरा फ़ुरकत का ही रिश्ता निकले रास्ता कोई किसी तरह वहाँ जा निकले लुत्फ़ लौटायेंगे अब सूखते होठों का उसे एक मुद्दत से तमन्ना थी...

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हर दम दुआएँ देना - जिगर मुरादाबादी
हर दम दुआएँ देना - जिगर मुरादाबादी

हर दम दुआएँ देना हर लम्हा आहें भरना इन का भी काम करना अपना भी काम करना याँ किस को है मय्यसर ये काम कर गुज़रना एक बाँकपन पे जीना एक बाँकप...

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किसलिए आये थे हम क्या कर चले  - ख्न्वाजा मीर दर्द
किसलिए आये थे हम क्या कर चले - ख्न्वाजा मीर दर्द

तुहमतें चन्द अपने ज़िम्मे धर चले किसलिए आये थे हम क्या कर चले ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले क्या हमें का...

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सुना है वो हमें भुलाने लगे है - ख़ुमार बारमबंकवी
सुना है वो हमें भुलाने लगे है - ख़ुमार बारमबंकवी

सुना है वो हमें भुलाने लगे है तो क्या हम उन्हे याद आने लगे है हटाए थे जो राह से दोस्तो की वो पत्थर मेरे घर में आने लगे है ये कहना था उ...

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इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ - कृष्ण बिहारी नूर
इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ - कृष्ण बिहारी नूर

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुत इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुत रात हो दिन हो ग़फ़लत हो कि बेदारी हो उसको देखा त...

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तू मुझे इतने प्यार से मत देख- अली सरदार जाफ़री
तू मुझे इतने प्यार से मत देख- अली सरदार जाफ़री

तू मुझे इतने प्यार से मत देख तेरी पलकों के नर्म साये में धूप भी चांदनी सी लगती है और मुझे कितनी दूर जाना है रेत है गर्म, पाँव के छाले...

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तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे  - वसीम बरेलवी
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे - वसीम बरेलवी

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तस्सवुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो कि इस ...

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हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते  - गुलज़ार
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते - गुलज़ार

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन ऐसी तस्वीर के ...

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किसकी आवाज़ कान में आई - यगाना चंगेज़ी
किसकी आवाज़ कान में आई - यगाना चंगेज़ी

किसकी आवाज़ कान में आई दूर की बात ध्यान में आयी आप आते रहे बुलाते रहे आने वाली एक आन में आयी यह किनारा चला कि नाव चली कहिये क्या बात ...

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शायद मैं जिंदगी की सहर - सुदर्शन फाकिर
शायद मैं जिंदगी की सहर - सुदर्शन फाकिर

शायद मैं जिंदगी की सहर ले के आ गया क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया ता उम्र ढूँढता रहा मंज़िल मैं इश्क की अंजाम ये के गर्द-ऐ-सफर ले के ...

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वो फिराक और वो विसाल कहा
वो फिराक और वो विसाल कहा

वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ? वो शबो-रोजो-माहो-साल कहाँ? थी वो एक शख्स के तसव्वुर से अब वो रानाई-ए-ख़याल कहाँ? ऐसा आसां नहीं लहू रोना दिल में...

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पत्थर के खुदा - सुदर्शन फाकिर
पत्थर के खुदा - सुदर्शन फाकिर

पत्थर के खुदा, पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसान पायें हैं तुम शहर-ऐ-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं बुतखाना समझते हो जिसको पूछो न...

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चराग-ओ-आफ़ताब गुम - सुदर्शन फाकिर
चराग-ओ-आफ़ताब गुम - सुदर्शन फाकिर

चराग-ओ-आफ़ताब गुम, बड़ी हसीं रात थी, शबाब की नक़ाब गुम, बड़ी हसीं रात थी मुझे पिला रहे थे वो कि खुद ही शम्मा बुझ गयी, गिलास गुम, शराब गु...

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अब जुनूँ कब किसी के बस में है   - जॉन एलिया
अब जुनूँ कब किसी के बस में है - जॉन एलिया

अब जुनूँ कब किसी के बस में है उसकी ख़ुशबू नफ़स-नफ़स में है हाल उस सैद का सुनाईए क्या जिसका सैयाद ख़ुद क़फ़स में है क्या है गर ज़िन्दगी...

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लज्जते-आगाज ही को जाविदा समझा था में  - साग़र निज़ामी
लज्जते-आगाज ही को जाविदा समझा था में - साग़र निज़ामी

लज्जते-आगाज ही को जाविदा समझा था में ए मोहब्बत तेरी तल्खी को कहा समझा था में शौला-ए-गुल बेहयात व बर्के-खातिर बे सबात किन संधेरो को चिरा...

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कहाँ की शाम और कैसी सहर- साज़ जबलपुरी
कहाँ की शाम और कैसी सहर- साज़ जबलपुरी

कहाँ की शाम और कैसी सहर, जब तुम नहीं होते तडपता है ये दिल आठो पहर, जब तुम नहीं होते कली, किरने, महक, गुल, माहो अंजुम, चांदनी, शबनम सभी त...

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परिचय - जॉन एलिया Jon Elia
परिचय - जॉन एलिया Jon Elia

जॉन एलिया प्रसिद्द पत्रकार रईस अमरोही और पत्रकार और विश्व प्रसिद्द दार्शनिक सय्यद मुहम्मद तकी के भाई एवं प्रसिद्द कॉलम लिखने वाली जाहिदा हिन...

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आज यु टूट के रोया कोई - कैसर-उल-जाफ़री
आज यु टूट के रोया कोई - कैसर-उल-जाफ़री

दिल ने क्या आस लगा रखी थी  | रात भर शमा जला रखी थी | आज यु टूट के रोया कोई  जैसे पलकों पे घटा रखी थी | सुबह तक बर्फ पड़ेगी घर पर  रात कि आग...

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ग़ालिब का हैं अंदाज़-ए-बयाँ और
ग़ालिब का हैं अंदाज़-ए-बयाँ और

है बस कि हर एक उनके इशारे में निशाँ और करते हैं मुहब्बत तो गुज़रता है गुमां और या रब वो न समझे हैं न समझेंगे मेरी बात दे और दिल उन को जो न द...

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दर्द मिन्नत-कशे-दवा न हुआ
दर्द मिन्नत-कशे-दवा न हुआ

दर्द मिन्नत-कशे-दवा न हुआ | मै न अच्छा हुआ बुरा न हुआ || जमा करते हो क्यों रकीबो को | एक तमाशा हुआ गिला न हुआ || हम कहा किस्मत आजमाने जाए | ...

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बरसो के रतजगे कि थकन खा गयी मुझे -- कैसर-उल-जाफ़री
बरसो के रतजगे कि थकन खा गयी मुझे -- कैसर-उल-जाफ़री

बरसो के रतजगे कि थकन खा गयी मुझे सूरज निकल रहा था कि नींद आ गयी मुझे मै बिक गया था, बाद में बेसर्फ़ जान कर दुनिया मेरे दुकान पे, लौटा गयी ...

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परिचय - साहिर लुधियानवी
परिचय - साहिर लुधियानवी

साहिर लुधियानवी, वह जादूगर जो शब्दों को इस तरह से लिखता था, पिरोता था की वह सीधे दिल में उतर जाते थे | बल्कि आज भी उनके शायरी के लाखो दीवाने...

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चलने का होसला नहीं - परवीन शाकिर
चलने का होसला नहीं - परवीन शाकिर

चलने का होसला नहीं, रुकना मुहाल कर दिया इश्क के इस सफ़र ने तो मुझको निढाल कर दिया मिलते हुए दिलो के बीच और था फैसला कोई उसने मगर बिछड़ते...

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नींद की ओस से - शहरयार
नींद की ओस से - शहरयार

नींद की ओस से पलकों को भिगोये कैसे ? जागना जिसका मुकद्दर हो वो सोये कैसे ? रेत दामन में हो या दश्त में बस रेत ही है | रेत में फस्ले-तमन्...

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लाजिम था की देखो मेरा रस्ता
लाजिम था की देखो मेरा रस्ता

लाजिम था की देखो मेरा रस्ता कोई दिन और | तन्हा गये क्यों अब रहो तन्हा कोई दिन और || मिट जाएगा सर गर तेरा पत्थर न घिसेगा | हू दर पे तेरे नासि...

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औरत - कैफ़ी आज़मी
औरत - कैफ़ी आज़मी

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सबके दिल में है जगह तेरी
सबके दिल में है जगह तेरी

सबके दिल में है जगह तेरी जो तू राजी हुआ | मुझ पे गोया एक जमाना मेहरबा हो जाएगा ||  बाग़ में मुझको न ले जा वर्ना मेरे हाल पर | हर गुले-तर एक ...

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दिल में उतरेगी तो पूछेगी - शहरयार
दिल में उतरेगी तो पूछेगी - शहरयार

दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूं कितना है नौके-खजर ही बताएगी कि खूँ कितना है आंधिया आयी तो सब लोगो को मालूम हुआ परचमे-ख्वाब ज़माने में नगू...

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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है - अहमद फ़राज़
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है - अहमद फ़राज़

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है सुना है बोले तो बातो से फुल झड़ते है ये बात है तो चलो बात करक...

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इशरते कतरा है दरिया में फ़ना हो जाना
इशरते कतरा है दरिया में फ़ना हो जाना

इशरते कतरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना तुझसे किस्मत में मेरी सूरते-कुफ्ले-अबजद था लिखा बात के बनते ही जुदा ...

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चाँद तन्हा है, आसमा तन्हा - मीना कुमारी
चाँद तन्हा है, आसमा तन्हा - मीना कुमारी

चाँद तन्हा है, आसमा तन्हा दिल मिला है, कहा-कहा तन्हा बुझ गई आस, छुप गया तारा थरथराता रहा धुआ तन्हा जिन्दगी क्या इसी को कहते है जिस...

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उसके दुश्मन है बहुत आदमी अच्छा होगा- निदा फाजली
उसके दुश्मन है बहुत आदमी अच्छा होगा- निदा फाजली

उसके दुश्मन है बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा इतना सच बोल कि होठो का तबस्सुम न बुझे रौशनी ख़त्म न कर आगे अ...

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कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते है
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते है

ये हम जो हिज्र में दीवारों-दर को देखते है , कभी सबा को कभी नामाबर को देखते है  | वो आए हमारे घर में खुदा कि कुदरत है, कभी हम उनको कभी अपने घ...

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बल्ली मारां की वो पेचीदा दलीलों - गुलजार
बल्ली मारां की वो पेचीदा दलीलों - गुलजार

गुलज़ार साहब ग़ालिब के लिए लिखते है: बल्ली मारां की वो पेचीदा दलीलों की-सी गलिया सामने ताल के नुक्कड़ पे बटेरो के कसीदे गुदगुदाते हुई पान ...

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घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बगैर
घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बगैर

घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बगैर जानेगा अब भी तू न मेरा घर कहे बगैर कहते है जब रही न मुझे ताकते-सुखन जानू किसी के दिल की मै क्यों कर कहे ब...

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शेख इब्राहीम "ज़ौक"- परिचय
शेख इब्राहीम "ज़ौक"- परिचय

खाकानी-ए-हिंद शेख इब्राहीम "ज़ौक" सन १७८९ ई. में दिल्ली के एक गरीब सिपाही शेख मुह्ब्ब्द रमजान के घर पैदा हुए | शेख रमजान नवाब लुत्...

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एक गुडिया की कई कठपुतलियो में जान है - दुष्यंत कुमार
एक गुडिया की कई कठपुतलियो में जान है - दुष्यंत कुमार

एक गुडिया की कई कठपुतलियो में जान है, आज शायर, ये तमाशा देखकर हैरान है | खास सड़के बंद है तब से मरम्मत के लिए, ये हमारे वक़्त कि सब...

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देख फिर दीवारों-दर में आ गये - शहरयार
देख फिर दीवारों-दर में आ गये - शहरयार

लम्सो-लज्जत के असर में आ गये देख फिर दीवारों-दर में आ गये दूर कि चीज़े खला में खो गई पास के मंज़र नज़र में आ गये जिस्म को गन्दुम-महक ने ...

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अब किससे मिलाती है हमें - शहरयार
अब किससे मिलाती है हमें - शहरयार

तुझसे बिछुड़े है तो अब किससे मिलाती है हमें जिन्दगी देखिये क्या रंग दिखाती है हमें मरकजे-दीद-ओ-दिल तेरा तसव्वुर था कभी अब इस बात पे कितन...

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ख्वाहिशे शराब - फ़रीद जावेद
ख्वाहिशे शराब - फ़रीद जावेद

आज सुकूं में ढल गया दिल का तमाम इजिताराब तशना-लबी के बावजूद अब नहीं ख्वाहिशे शराब जामो-सुबू का खेल था कैसे संभालता शराब कोशिशे-एहतियात से च...

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मुझे बुरा कहिये - दाग देहलवी
मुझे बुरा कहिये - दाग देहलवी

न रवा कहिये न सजा कहिये कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये दिल में रखने कि बात है ग़म-ए-इश्क इस को हरगिज़ न बरमला कहिये वो मुझे क़त्ल कर के कहते है म...

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कभी हालात पे रोना आया - साहिर लुधियानवी
कभी हालात पे रोना आया - साहिर लुधियानवी

कभी खुद पे, कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया हम तो समझे थे कि हम भूल गए है उनको क्या हुआ आज, यह किस बात पे रोना...

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ये न थी हमारी किस्मत कि विसाले यार होता -ग़ालिब
ये न थी हमारी किस्मत कि विसाले यार होता -ग़ालिब

ये न थी हमारी किस्मत कि विसाले यार होता अगर और जीते रहते यही इन्तजार होता तेरे वादे पर जिए हम तो यह जान छुट जाना की ख़ुशी से मर न जाते ...

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इश्क़ मुझको नहीं, वहशत ही सही
इश्क़ मुझको नहीं, वहशत ही सही

इश्क़ मुझको नहीं, वहशत ही सही मेरी वहशत, तेरी शोहरत ही सही क़तअ़  कीजे न तअ़ल्लुक़ हम से कुछ नहीं है, तो अ़दावत ही सही मेरे होने में है क्या...

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दुआ साथ लिए जा - साहिर लुधियानवी
दुआ साथ लिए जा - साहिर लुधियानवी

बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा टूटा हुआ इकरार-ए-वफ़ा साथ लिए जा इक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए ...

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नदिया इस साल - हीरालाल नागर
नदिया इस साल - हीरालाल नागर

तोड़ सभी तटबंध गाव के उमड़ चली नदिया इस साल फसल, खेत, खलिहान, गाव को रोंद चली नदिया इस साल अपने सौतो का मीठा जल जिन्हें पिलाकर पाला था पैर ...

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मुझको सजा मिले - दाग देहलवी
मुझको सजा मिले - दाग देहलवी

गर मेरे अश्के-सुर्ख से रंगे हिना मिले जो चोर कि सजा वह मुझको सजा मिले जाते थे मुह छिपाए हुए मयकदा को हम आते हुए उधर से कई पारसा मिले अपनी ...

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मौके को निकल जाने दिया - राजेश रेड्डी
मौके को निकल जाने दिया - राजेश रेड्डी

हाथ से हर एक मौके को निकल जाने दिया हमने ही खुशियों को रंजोगम में ढल जाने दिया जीत बस एक वार कि दुरी पे थी हमसे मगर दुश्मनों को हमने मैदा...

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हवा गरम- रंजित भट्टाचार्य
हवा गरम- रंजित भट्टाचार्य

हवा गरम, फिजा गरम, दायर भी गरम-गरम मै पी रहा हू चाय सी ये जिन्दगी गरम-गरम ग़मों कि सर्द रोटियों के साथ चाय कि तरह  तू कम से कम परोस दे मुझे...

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वह बुढा-सा एक पेड़ - गुलज़ार
वह बुढा-सा एक पेड़ - गुलज़ार

मोड़ पे देखा है वह बुढा-सा एक पेड़ कभी ? मेरा वाकिफ है, बहुत सालो से मै उसे जानता हू जब मै छोटा था तो एक आम उड़ने के लिए परली दीवार से...

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हर एक बात पे कहते हो
हर एक बात पे कहते हो

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है ? तुम्ही कहो कि ये अंदाजे-गुफ्तगू क्या है ? न शोले में ये करिश्मा न बर्क में ये अदा कोई बताओ कि वो शो...

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अगर कही है स्वर्ग - शैलेन्द्र
अगर कही है स्वर्ग - शैलेन्द्र

तू जिन्दा है तो जिन्दगी कि जीत में यकीन कर अगर कही है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन ये दिन ...

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ग़ालिब के लतीफे - 3
ग़ालिब के लतीफे - 3

1. एक बार गालिब के घर कोई उनका प्रशंसक मिलने आया. गालिब साहब अपने शयन कक्ष में सपत्नीक बैठे थे | आगंतुक ने बैठक में बैठे नौकर को अपना विज...

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