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मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी - राही मासूम रज़ा
मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी - राही मासूम रज़ा

फिर आपके लिए राही साहब की एक और रचना मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी मंदिर राम का निकला लेकिन मेरा लावारिस दिल अब जिस की जंबील में कोई ख...

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मेरा नाम मुसलमानों जैसा है - राही मासूम रज़ा
मेरा नाम मुसलमानों जैसा है - राही मासूम रज़ा

मेरा नाम मुसलमानों जैसा है मुझ को क़त्ल करो और मेरे घर में आग लगा दो मेरे उस कमरे को लूटो जिसमे मेरी बयाने जाग रही है और मै जिसमे तुलसी...

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सरफरोशी की तमन्ना - राम प्रसाद बिस्मिल
सरफरोशी की तमन्ना - राम प्रसाद बिस्मिल

हमारे देश का न जाने क्या रिवाज है समझ नहीं आता सभी शहीद दिवस तो मानते है पर भगत सिंह का जन्मदिवस याद नहीं रहता. आज शहीद भगत सिंह का जन्मदिव...

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सीने में जलन - शहरयार
सीने में जलन - शहरयार

सीने में जलन आँखों में तूफान सा क्यू है  इस शहर में हर शख्श परेशां सा क्यू है  दिल है तो धडकने का बहाना कोई ढूंढे  पत्थर की तरह बेहिस-ब...

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इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारो है - शहरयार
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारो है - शहरयार

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारो है  इन आँखों से वाबस्ता अफसाने हज़ारो है  इक तुम ही नहीं तन्हा उल्फत में मेरी रुसवा इस शहर में तुम जैसे...

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कल चौदवीं की रात थी - इब्ने इंशा
कल चौदवीं की रात थी - इब्ने इंशा

कल चौदवीं की रात थी, शब् भर रहा चर्चा तेरा कुछ ने कहा ये चाँद है, कुछ ने कहा चेहरा तेरा हम भी वही मौजूद थे, हमसे भी सब पूछा किये हम ...

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अमीरे शहर को तलवार करने वाला हू - मुनव्वर राणा
अमीरे शहर को तलवार करने वाला हू - मुनव्वर राणा

अमीरे शहर को तलवार करने वाला हू, मै जी हुजूरी से इंकार करने वाला हू ! कहो अंधेरो से दामन समेट ले अपना, मै जुगनुओ को अलमदार करने वाला हू ...

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इंसान - नीरज
इंसान - नीरज

अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमे इंसान को इंसान बनाया जाए ! जिसकी खुशबू से महक जाये पडोसी का भी घर, फुल इस किस्म का हर सिम्त खिलाया ज...

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परिचय - राही मासूम रज़ा
परिचय - राही मासूम रज़ा

डा. राही मासूम रज़ा, इस व्यक्ति के बारे में मुझे ज्यादा बताने कि जरुरत नहीं है क्योकि अदब को जानने वालो में ये बहुत प्रसिद्द है फिर में उनके ...

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हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद - राही मासूम रज़ा
हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद - राही मासूम रज़ा

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद, अपनी रात कि छतपर, कितना तन्हा होगा चाँद ! जिन आँखों में काजल बनकर, तेरी काली रात, उन आँखों...

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किसी रोते हुए बच्चे को हसाया जाये- निदा फाजली
किसी रोते हुए बच्चे को हसाया जाये- निदा फाजली

अपना ग़म लेके कही और न जाया जाये, घर में बिखरी हुई चीजो को सजाया जाये ! जिन चिरागों को हवाओ का कोई खौफ नहीं, उन चिरागों को हवाओ से ब...

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कितना सफर - लीलाधर मंडलोई
कितना सफर - लीलाधर मंडलोई

जाने किस वक्त कि रहगुज़र पे तू ये शिकस्ता जिस्म और दस्ते तन्हाई बैठा हू सांस रोके पीटने हेरता हू घायल चाँद को मै झरते है कुछ बेतासीर लफ्ज ब...

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छू नहीं सकते -शाहिदा हसन
छू नहीं सकते -शाहिदा हसन

दोस्तों आप लोगो के लिए इस बार एक कविता बहुत से रंग है मेरे हमेशा खुबसूरत और तरोताजा जिन्हें तुम छू नहीं सकते बहुत-सी बरिशे होती है मुझमे ज...

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हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है - इब्ने इंशा
हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है - इब्ने इंशा

हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है, कुछ अपनी जसारत होती है, कुछ उनका इशारा होता है ! काटने लगी राते आँखों में, देख...

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कुछ शेर- मुनव्वर राना
कुछ शेर- मुनव्वर राना

लिपट जाता हू माँ से और मौसी मुस्कुराती है में उर्दू में ग़ज़ल कहता हू हिंदी मुस्कुराती है लड़कपन में किए वादे कि कीमत कुछ नहीं होती अ...

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शाम आई तेरी यादो के सितारे निकले  - परवीन शाकिर
शाम आई तेरी यादो के सितारे निकले - परवीन शाकिर
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शाम के सावले चेहरे को निखारा जाए - कतील शिफाई
शाम के सावले चेहरे को निखारा जाए - कतील शिफाई

शाम के सावले चेहरे को निखारा जाये क्यों न सागर से कोई चाँद उभारा जाये रास आया नहीं तस्कीन का साहिल कोई फिर प्यास को दरिया में उतारा जाय...

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सावन के सुहाने मौसम में इक नार मिली बादल जैसी - कतील शिफाई
सावन के सुहाने मौसम में इक नार मिली बादल जैसी - कतील शिफाई

सावन के सुहाने मौसम में इक नार मिली बादल जैसी, बे-पंख उड़ाने लेती है, जो अपने ही आँचल जैसी ! लाया है बना कर उसको दुल्हन, ये जोबन, ये अलब...

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अजब खुलूस अजब सादगी से करता है  - अतुल अजनबी
अजब खुलूस अजब सादगी से करता है - अतुल अजनबी

अजब-खुलूस अजब सादगी से करता है दरख्त नेकी बड़ी ख़ामोशी से करता है मै उसका दोस्त हु अच्छा, यही नहीं काफी उम्मीद और भी कुछ दोस्ती से करता है...

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दामन - शहरयार
दामन - शहरयार

ऐसे हिज्र के मौसम कब कब आते है तेरे अलावा याद हमें सब आते है जागती आँखों से भी देखो दुनिया को ख्वाबो का क्या है वो हर शब् आते है  जज्ब करे क...

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बतलाये क्या - ग़ालिब
बतलाये क्या - ग़ालिब

जौर से बाज़ आए पर बाज़ आए क्या ? कहते है हम तुझको मुह दिखलाये क्या ? रात-दिन गर्दिश में है सात आसमा ! हो रहेगा कुछ न कुछ घबराये क्या ? लाग...

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हिज्र - ग़ालिब
हिज्र - ग़ालिब

ये हम जो हिज्र में दीवारों-दर को देखते है कभी सबा को कभी नामाबर को देखते है वो आए घर में हमारे खुदा कि कुदरत है  कभी हम उनको कभी अपने घर को...

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क्या करे - ग़ालिब
क्या करे - ग़ालिब

दोनों जहा देके वो समझे ये खुश रहा ! यां आ पड़ी ये शर्म कि तकरार क्या करे ? थक-थक के हर मुकाम पे दो-चार रह गए ! तेरा पता न पाए तो नाचार क्य...

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अभी तो चोंच में चिड़िया के दाना तक नहीं आया  - मुनव्वर राना
अभी तो चोंच में चिड़िया के दाना तक नहीं आया - मुनव्वर राना

मोहब्बत में तुम्हे आंसू बहाना नहीं आया, बनारस में रहे और पान खाना नहीं आया ! न जाने लोग कैसे है मोम कर देते है पत्थर को, हमें तो आप क...

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कभी मोम बन के पिघल गया - अहमद फ़राज़
कभी मोम बन के पिघल गया - अहमद फ़राज़

कभी मोम बन के पिघल गया कभी गिरते गिरते संभल गया वो बन के लम्हा गुरेज का मेरे पास से निकल गया उसे रोकता भी तो किस तरह कि वो शख्स ...

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वो जो हम में तुम में करार था - मौमिन
वो जो हम में तुम में करार था - मौमिन

वो जो हम में तुम में करार था तुम्हे याद हो के न याद हो, वही यानी वादा निबाह का, तुम्हे याद हो के न याद हो ! वो नए गिले वो शिकायते वो मजे-...

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हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले - ग़ालिब
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले - ग़ालिब

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन...

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आँखे- शहरयार
आँखे- शहरयार

कब समाँ देखेंगे हम जख्मो के भर जाने का नाम लेता ही नहीं वक़्त गुजार जाने का जाने वो कौन है जो दामने-दिल खिचता है जब कभी हमने इरादा किया म...

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कोई दीवाना कहता हैं - कुमार विश्वाश
कोई दीवाना कहता हैं - कुमार विश्वाश

कोई दीवाना कहता हैं कोई पागल समझता हैं मगर धरती कि बेचैनी को बस बादल समझता हैं मैं तुझसे दूर कैसा हू, तू मुझसे दूर कैसी हैं यह तेरा दिल स...

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किश्ती के मुसाफिर ने समुन्दर नहीं देखा - बशीर बद्र
किश्ती के मुसाफिर ने समुन्दर नहीं देखा - बशीर बद्र

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा किश्ती के मुसाफिर ने समुन्दर नहीं देखा बेवक्त अगर जाऊँगा सब चौक पड़ेंगे इक उम्र हुई दिन में कभी घर...

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अब बुलाऊ भी तुम्हे - गोपालदास नीरज
अब बुलाऊ भी तुम्हे - गोपालदास नीरज

अब बुलाऊ भी तुम्हे तो तुम न आना ! टूट जाए शीघ्र जिससे आस मेरी छुट जाए शीघ्र जिससे सास मेरी, इसलिए यदि तुम कभी आओ इधर तो, द्वार तक आकर हम...

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जिन्दगी - जावेद अख्तर
जिन्दगी - जावेद अख्तर

हम तो बचपन में भी अकेले थे सिर्फ दिल की गली में खेले थे एक तरफ मोर्चे थे पलकों के एक तरफ आंसुओ के रेले थे थी सजी हसरते दुकानों पर ...

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यह न सोचो कल क्या हो - मीना कुमारी
यह न सोचो कल क्या हो - मीना कुमारी

यह न सोचो कल क्या हो कौन कहे इस पल क्या हो रोओ मत, न रोने दो ऐसी भी जल-थल क्या हो बहती नदी को बांधे बाँध चुल्लू में हलचल क्या हो ...

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इक दिन ये धरती नीला अम्बर होती - बशीर बद्र
इक दिन ये धरती नीला अम्बर होती - बशीर बद्र

इक दिन ये धरती नीला अम्बर होती काश मेरे सर पर मेरी चादर होती जिन चीजो से दीवारे घर बनती है ऐसी कोई चीज हमारे घर होती कवर लिहाफ़ो के ...

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मेरी आँखों में ग़म की निशानी नहीं - बशीर बद्र
मेरी आँखों में ग़म की निशानी नहीं - बशीर बद्र

मेरी आँखों में ग़म की निशानी नहीं पत्थरों के प्यालो में पानी नहीं मै तुझे भूल कर भी नहीं भूलता प्यार सोना है सोने का पानी नहीं मेरी...

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कहा आंसुओ की यह सौगात होगी - बशीर बद्र
कहा आंसुओ की यह सौगात होगी - बशीर बद्र

कहा आंसुओ की यह सौगात होगी नए लोग होंगे नई बात होगी मै हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी चरागों को आँखों म...

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आंधिया गम की चलेंगी तो संवर जाऊँगा - बहादुर शाह जफ़र
आंधिया गम की चलेंगी तो संवर जाऊँगा - बहादुर शाह जफ़र

आंधिया गम की चलेंगी तो संवर जाऊँगा मै तेरी जुल्फ नहीं जो बिखर जाऊँगा तुझसे बिछडा तो मत पूछो किधर जाऊँगा मै तो दरिया हू समुन्दर में उत...

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दिल में उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखे - राही मासूम रज़ा
दिल में उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखे - राही मासूम रज़ा

दिल में उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखे बोलो तुम को गैर लिखे या अपना मीत लिखे नीले अम्बर कि अंगनाई में तारो के फूल  मेरे प्यासे होठो ...

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