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बरसो के रतजगे कि थकन खा गयी मुझे
सूरज निकल रहा था कि नींद आ गयी मुझे

मै बिक गया था, बाद में बेसर्फ़ जान कर
दुनिया मेरे दुकान पे, लौटा गयी मुझे

आखिर अना से जीत गयी, मेरी मुफलिसी
चादर हटा के राह में फैला गयी मुझे

दुनिया निबाहती है बहुत कम किसी के साथ
क्या जाने किस ख्याल से रास आ गयी मुझे

ए जिन्दगी ! तमाम लहू रायगा हुआ
किस दश्ते-कमसवाद में बरसा गयी मुझे

'कैसर' नजात मिल न सकी शामे दर्द से
इतना हुआ कि रस्मे दुआ आ गयी मुझे
                                                -- कैसर-उल-जाफ़री

मायने

बेसर्फ़=व्यर्थ, अना=स्वाभिमान, मुफलिसी=गरीबी, रायगा=व्यर्थ, दश्ते-कमसवाद=अल्पप्रतिभावान/तुच्छ क्षेत्र, शामे-दर्द=दर्द की शाम

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