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गर मेरे अश्के-सुर्ख से रंगे हिना मिले
जो चोर कि सजा वह मुझको सजा मिले

जाते थे मुह छिपाए हुए मयकदा को हम
आते हुए उधर से कई पारसा मिले

अपनी भी सहमत आ गई तौबा के साथ ही
अहदे-शबाब के जो कही आशना मिले

शौके-विलास खाक में सबको मिलेगा 
तुम क्यों मिलो किसी से तुम्हारी बला मिले

अल्लाह दे तो फख्र कि दौलत है सल्तनत 
जितने फकीर मुझको मिले बादशा मिले

दुनिया में दिल्लगी के लिए कुछ तो चाहिए 
हम इस बुतों से मिलते है जब तक खुदा मिले

ऐ दाग अपनी वजअ हमेशा यही रही
कोई खिंचा, ख्निचे, कोई हमसे मिला मिले
                                                    - दाग देहलवी
मायने 
रंगे-हिना=मेहंदी का रंग, अहदे-शबाब=युवावस्था, सल्तनत=राज्य, बादशा=राजा, वजअ= शैली/ढंग

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