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ये हम जो हिज्र में दीवारों-दर को देखते है,
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते है  |
वो आए हमारे घर में खुदा कि कुदरत है,
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते है |
नज़र न लगे कही उसके दस्तो-बाजू को,
ये लोग क्यों मेरे जख्मे जिगर देखते है |
मायने-
हिज्र=बिछोह, दोवारो-दर=दीवारे और दरवाजे, नामाबर=पत्र वाहक, दस्तो बाजू=हाथो और बाहों को, जख्मे-जिगर=दिल के घाव
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