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दिल ने क्या आस लगा रखी थी  |
रात भर शमा जला रखी थी |

आज यु टूट के रोया कोई 
जैसे पलकों पे घटा रखी थी |

सुबह तक बर्फ पड़ेगी घर पर 
रात कि आग बचा रखी थी |

जब कभी शमा जलने उठे 
हर दरीचे पे हवा रखी थी |

जिन्दगी पी तो बड़ी तल्ख लगी 
जाने क्या चीज़ मिला रखी थी |

गिर के संभला हू तो देखा "कैसर"
राह में माँ कि दुआ रखी थी |
                                                             -केसर-उल-जाफ़री

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