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मेरे कमरे में अँधेरा नहीं रहने देता |
आपका ग़म मुझे तन्हा नहीं रहने देता ||

वो तो अच्छा हुआ शमशीरजनी आती थी |
वरना दुश्मन हमें जिन्दा नहीं रहने देता ||

मुफलिसी घर में ठहरने नहीं देती मुझको |
और परदेश में बेटा नहीं रहने देता ||

तिश्नगी मेरा मुकद्दर है इसी से शायद |
मै परिंदों को भी प्यासा नहीं रहने देता ||

रेत पर खलते बच्चो को अभी क्या मालूम |
कोई सैलाब घरोंदा नहीं रहने देता ||

ग़म से लछमन की तरह भाई का रिश्ता है मेरा |
मुझको जंगल में अकेला नहीं रहने देता ||- मुनव्वर राना
मायने
शमशीरजनि=तलवारबाजी, तिशनगी=प्यास 

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  1. आभार मुनव्वर जी की ख़ूबसूरत ग़ज़ल पढवाने के लिए।
    चित्र तो कमाल का लगाया है।

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