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जौर से बाज़ आए पर बाज़ आए क्या ?
कहते है हम तुझको मुह दिखलाये क्या ?
रात-दिन गर्दिश में है सात आसमा !
हो रहेगा कुछ न कुछ घबराये क्या ?
लाग हो तो उसको हम समझे लगाव !
जब न हो कुछ भी तो धोखा खाए क्या ?
हो लिए क्यों नामावर के साथ-साथ !
याँ रब अपने ख़त को हम पहुचाये क्या ?
उम्र भर देखा किये मरने कि राह !
मर गए पर देखिये दिखलाये क्या ?
पूछते है वो कि 'ग़ालिब' कौन है ?
कोई बतलाओ कि हम बतलाये क्या ?
                                         - ग़ालिब
मायने- जौर=जुल्म

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