0

ये हम जो हिज्र में दीवारों-दर को देखते है
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते है
वो आए घर में हमारे खुदा कि कुदरत है 
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते है
नज़र लगे न कही उसके दस्तो-बाजू को 
ये लोग क्यों मेरे जख्मे-जिगर को देखते है 
                                            - ग़ालिब 
मायने -
हिज्र=बिछोह, दीवारों-दर=दीवारों और दरवाजे , नामाबर=पत्र वाहक, दस्तो-बाजू=हाथो और बाहों को, जख्मे-जिगर=दिल के घाव  

Post a Comment Blogger

 
Top