0
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारो है 
इन आँखों से वाबस्ता अफसाने हज़ारो है 

इक तुम ही नहीं तन्हा उल्फत में मेरी रुसवा
इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारो है 

इक सिर्फ हम ही मय को आँखों से पिलाते है 
कहने को तो दुनिया में मैखाने हज़ारो है 

इस शम्म-ए-फरोजा को आंधी से डराते हो 
इस शम्म-ए-फरोजा के परवाने हज़ारो है 
                                             - शहरयार
इस ग़ज़ल को फिल्म उमराव जान के लिए लिखा गया था. 
फिल्म में नायिका  उमराव जान ( रेखा ) एक शायरा भी है 
और उनका तखल्लुस "अदा" है
video

Post a Comment Blogger

 
Top