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दोस्तों आप लोगो के लिए इस बार एक कविता

बहुत से रंग है मेरे
हमेशा खुबसूरत
और तरोताजा
जिन्हें तुम छू नहीं सकते
बहुत-सी बरिशे
होती है मुझमे
जिनकी आवाजे
कभी तुम सुन नहीं सकते
बहुत से ख्वाब है
खुशरंग यादो से भरे रास्तो पे
चलके जो
मेरी आँखों तक आते है
मगर तुम इनकी आहट को नहीं
महसूस कर सकते
बहुत से ग़म है
जो करवट बदलती रात के
पहलु से लगकर मुस्कुराते है
मगर इस मुस्कराहट कि खबर
तुमको नहीं होती
ये दुरी है
हमेशा कि
जिसे शायद
मुसलसल मुझको सहना है
मगर फिर भी 
तुम्हारे साथ रहना है
                          - शाहिदा हसन

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