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दोनों जहा देके वो समझे ये खुश रहा !
यां आ पड़ी ये शर्म कि तकरार क्या करे ?
थक-थक के हर मुकाम पे दो-चार रह गए !
तेरा पता न पाए तो नाचार क्या करे ?
क्या शामअ के नहीं है हवाख्वाह अहले-बज्म
हो ग़म ही जांगुदाज तो गमख्वार क्या करे ?
                                             - ग़ालिब
मायने-
हवाख्वाह=शुभचिंतक,  जांगुदाज=जान को घुलाने वाला

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