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जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं !
तेरे दामन में मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं !!

आप इन हाथो कि चाहे तो तलाशी ले ले !
मेरे हाथो में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं !!

हमने देखा है कई ऐसे खुदाओ को यहाँ !
सामने जिनके वो सचमुच का खुदा कुछ भी नहीं !!

ये अलग बात है वो रास न आया खुद को !
उस भले शख्स में वैसे तो बुरा कुछ भी नहीं !!

बाते फैली है मेरे नाम से जाने क्या-क्या !
जबकि सच ये है कि मैंने तो कहा कुछ भी नहीं !!

या खुदा! अब ये किस रंग में आई है बहार !
जर्द ही जर्द है पेड़ो पे हरा कुछ भी नहीं !!

दिल भी एक बच्चे कि मानिंद अड़ा है जिद पर !
या तो सब कुछ इसे चाहिए या कुछ भी नहीं !!- राजेश रेड्डी 

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