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यु कभी-कभी तो नजारा करेंगे हम
पहना करो नकाब, उतारा करेंगे हम

महताब कि जबी पे पसीने को देखना
जब नाम लेके तुमको पुकारा करेंगे हम

हमसे इबादतों में कमी रह गई अगर
रह-रह के अपने माथे पे मारा करेंगे हम

मंजिल से मिल सका न हमे गर कोई जवाब
मुड-मुड के फिर से तुमको पुकारा करेंगे हम

वक्ते सहर जो रात कि लो झिलमिला गई
उठ कर तुम्हारी जुल्फ सवारा करेंगे हम - मीना कुमारी
मायने-
महताब=चाँद, जबी=माथा, सहर= सुबह

Roman

yun kabhi kabhi to nazara karenge hum
pahna karo naqab, utara karenge hum

mahtab ki zabin pe pasine ko dekhna
jab naam leke tumko pukara karenge hum

hamse ibadato me kami rah gai agar
rah-rah ke apne mathe pe mara karenge hum

manzil se mil saka n hame gar koi jawab
mud-mud ke fir se tumko pukara karenge hum

waqt-e-sahar jo raat ki lo jhilmila gai
uth kar tumhari zulf sawara karenge hum - Meena Kumari Naaz
#Jakhira

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