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जाने कितनी उड़ान बाकी है !
इस परिंदे में जान बाकी है !!

जितनी बाटनी थी,बट चुकी ये जमी !
अब तो बस आसमान बाकी है !!

अब वो दुनिया अजीब लगती है !
जिसमे अमनो-अमन बाकी है !!

इम्तिहा से गुजर के क्या देखा !
एक नया इम्तहान बाकी है !!

सर कलम होंगे कल यहाँ उनके !
जिनके मुह में जुबान बाकी है !!-    राजेश रेड्डी 

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