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दिले नादां तुझे हुआ क्या है ?
आखिर इस दर्द कि दवा क्या है  ?
हम है मुश्ताक और वो बेजार !
या इलाही ये माजरा क्या है ?
मै भी मुह मै जुबान रखता हू !
काश ! पूछो कि मुद्दआ क्या है ?
जबकि तुझ बिन नहीं कोई मोजूद !
फिर ये हंगामा ऐ खुदा ! क्या है ?
ये परी-चेहरा लोग कैसे है ?
गमजा-ओ-इशवा-ओ-अदा  क्या है ?
सब्जा-ओ-गुल कहा से आए है ?
अब्रा क्या चीज़ है, हवा क्या है ?
हमको उनसे वफ़ा कि है उम्मीद !
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है ?
हां, भला कर तेरा भला होगा !
दरवेश कि सदा क्या है ?
जान तुम पर निसार करता हू !
मै नहीं जानता दुआ क्या है ?
मैंने माना कि कुछ नहीं ग़ालिब !
मुफ्त हाथ आए तो बुरा क्या है ?
                             - ग़ालिब
मायने 
मुश्ताक = उत्सुक, गमजा-ओ-इशवा-ओ-अदा = नाज और अदा,    
सब्जा-ओ-गुल = पत्ते/फूल, अब्र = बादल, सदा = फकीर की आवाज़

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  1. कितनी सादगी भरी है ग़ालिब कि इस कालजयी ग़ज़ल में....अदभुत..अद्वितीय
    ब्रह्मांड

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